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बीरभूम हिंसा: सीबीआई या एनआईए से जांच की मांग पर हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, जानें पूरा मामला 

Thu, 24 Mar 2022 10:58 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ के समक्ष राज्य सरकार ने सीबीआई या एनआईए से जांच की मांगों का विरोध किया था। राज्य ने दलील दी थी कि जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है और उसे जांच के लिए थोड़ा वक्त दिया जाना चाहिए।
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कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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बीरभूम हिंसा मामले की सीबीआई या एनआईए से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिकाओं पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए बुधवार को राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की थी। कोर्ट अब कल यानी शुक्रवार को आदेश जारी कर सकता है।

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चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ के समक्ष राज्य सरकार ने सीबीआई या एनआईए से जांच की मांगों का विरोध किया था। राज्य ने दलील दी थी कि जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है और उसे जांच के लिए थोड़ा वक्त दिया जाना चाहिए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वाईजे दस्तूर ने पीठ को बताया कि सीबीआई या एनआईए निर्देश मिलने पर जांच शुरू करने को तैयार हैं। 

उन्होंने यह भी बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद सीएफएसएल की सात सदस्यीय सीट कोलकाता पहुंच गई है और घटनास्थल से सुबूत व साक्ष्य जुटाने शुरू कर देगी। उन्हें सीआरपीएफ के जवान सुरक्षा प्रदान करेंगे। वहीं राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल एसएन मुखर्जी ने कोर्ट के समक्ष आपराधिक मामलों की केस डायरी पेश की। साथ ही जारी जांच पर एक रिपोर्ट भी सौंपी। उन्होंने बताया कि 31 सीसीटीवी कैमरे घटनास्थल पर लगा दिए गए हैं। पीठ ने कहा, सभी पक्षों की दलीलों पर गौर फरमाने के बाद अगली सुनवाई में यानी शुक्रवार को आदेश जारी किया जाएगा। 
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तृणमूल कांग्रेस रामपुरहाट-एक प्रखंड अध्यक्ष अनारुल हुसैन गिरफ्तार
मामले में तृणमूल कांग्रेस रामपुरहाट-1 के प्रखंड अध्यक्ष अनारुल हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इलाके में संभावित अशांति के बारे में स्थानीय लोगों की आशंका पर ध्यान नहीं देने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था। अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश देने के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने हुसैन को जिले के तारापीठ से गिरफ्तार कर लिया।

मुख्यमंत्री की फटकार के बाद एसडीपीओ निलंबित
बीरभूम पुलिस ने रामपुरहाट के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) शायान अहमद को निलंबित कर दिया है। उन्हें अनिवार्य प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। इससे कुछ घंटे पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रामपुरहाट में कुछ पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई और कहा कि ड्यूटी में लापरवाही के कारण शायद यह घटना हुई है।

भाजपा की केंद्रीय टीम बीरभूम पहुंची पीड़ित परिवारों को दिया मदद का भरोसा
भाजपा की केंद्रीय टीम बीरभूम जिले के बोगतुई गांव पहुंची और स्थानीय लोगों से बातचीत की। टीम ने पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात की और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। टीम में यूपी के डीजीपी बृज लाल, मुंबई के पूर्व आयुक्त सत्य पाल सिंह, पूर्व आईपीएस केसी राममूर्ति, भारती घोष और बंगाल भाजपा प्रमुख सुकांता मजूमदार शामिल थे। मजूमदार ने कहा, हम लोग यहां स्थिति का जायजा लेने आए हैं। राज्य सरकार ने सत्ता में रहने का मौलिक अधिकार खो दिया है। बोगतुई में जो हुआ वह शर्मनाक है और मानवता के खिलाफ है। मुख्यमंत्री एक ओर सभी दोषियों को सजा दिलाने की बात कर रही हैं वहीं पुलिस मामले को रफा दफा करने की फिराक में है। 

मानवाधिकार आयोग ने बंगाल सरकार को भेजा नोटिस, डीजीपी से रिपोर्ट तलब 
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस भेजा और राज्य के डीजीपी से चार हफ्ते के भीतर रिपोर्ट तलब की है। इसमें पुलिस को लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताना होगा। आयोग ने बयान जारी किया कि घृणा हिंसा की ऐसी वारदातों से साफ होता है कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है।

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