दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस राजर्षि भारद्वाज ने अपने आदेश में कहा कि अदालत राज्य पुलिस प्रशासन की समग्र विफलताओं और संदिग्ध आचरण को ध्यान में रखते हुए जांच को सीबीआई को हस्तांतरित करना अनिवार्य समझती है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को अगरपाड़ा जूट मिल में जबरन प्रवेश और चोरी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को हस्तांतरित करने का आदेश दिया। सोववार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस की जांच पर असंतोष भी जताया।
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अगरपाड़ा जूट मिल लि. की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि 3 अगस्त की शाम को मिल में जबरन घुसने के इरादे से असामाजिक तत्वों का एक बड़ा समूह उत्तर 24 परगना जिले में मिल के बाहर इकट्ठा हुआ। पुलिस अधिकारियों ने 3,000 से अधिक श्रमिकों वाले कारखाने के परिसर में समूह के जबरन प्रवेश और चोरी को रोकने के लिए उचित कार्रवाई नहीं की थी, बल्कि उसे बढ़ावा दिया। पुलिस की तरफ से कहा गया कि उसके आने से पहले ही भीड़ मिल परिसर में घुस चुकी थी और उसने आते ही हालात को संभाला था।
दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस राजर्षि भारद्वाज ने अपने आदेश में कहा कि अदालत राज्य पुलिस प्रशासन की समग्र विफलताओं और संदिग्ध आचरण को ध्यान में रखते हुए जांच को सीबीआई को हस्तांतरित करना अनिवार्य समझती है। अदालत ने सीबीआई से 11 नवंबर को कोर्ट में जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है जब मामले में अगली सुनवाई होगी। साथ ही राज्य पुलिस को मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, केस डायरी और एफआईआर की कॉपी सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है।