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कलकत्ता हाईकोर्ट: गणतंत्र दिवस परेड में पश्चिम बंगाल की झांकी शामिल करने की मांग वाली याचिका खारिज

Mon, 24 Jan 2022 05:20 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि गणतंत्र दिवस बुधवार को है और याचिकाकर्ता ने अदालत तक आने में बहुत देर कर दी है। अब इसे लेकर कोई प्रभावी निर्देश जारी करना संभव नहीं है।
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Calcutta High Court - फोटो : www.calcuttahighcourt.gov.in
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विस्तार
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गणतंत्र दिवस की परेड में पश्चिम बंगाल की झांकी को शामिल न किए जाने के फैसले पर विवाद लगातार जारी है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर आधारित इस झांकी को परेड में शामिल करने की अनुमति देने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग के साथ एक याचिका भी कलकत्ता हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने सोमवार को इस याचिका को खारिज कर दिया। 

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हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायाधीश राजर्षि भारद्वाज की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने मामले में अदालत तक पहुंचने में बहुत देर कर दी है और अब इस संबंध में कोई प्रभावी निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है। पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'इसलिए, वर्तमान रिट याचिका में हस्तक्षेप की कोई परिस्थिति नहीं बनती है जिसे उसी के अनुसार खारिज किया जाता है।'
यह याचिका हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता ने दाखिल की थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि यह नेताजी जी की 125वीं जयंती का वर्ष है और केंद्र ने गणतंत्र दिवस परेड के लिए राज्य की झांकी को शामिल न करने का फैसला करके गलत किया है और कोई कारण भी नहीं बताया है। राज्य की यह झांकी महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना पर आधारित है। 

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'वर्तमान सरकार नेताजी को 'आइकन' की तरह सम्मान दे रही है'
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वाईजे दस्तूर ने याचिका में तकनीकी कमियों का हवाला देते हुए कहा कि यह विचार योग्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि नेताजी को पूर्व की सरकारों ने नजरअंदाज किया था। वर्तमान सरकार नेताजी को एक 'आइकन' की तरह सम्मान दे रही है और देश की आजादी की प्रक्रिया में उनके योगदानों को पहचान दे रही है।

उधर, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता एसएन मुखर्जी ने कहा कि झांकी को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल न किए जाने के फैसले के कारण को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार के साथ कोई संवाद नहीं हुआ है।  बता दें कि पश्चिम बंगाल सरकार ने झांकी को शामिल न करने के फैसले के प्रति जोरदार आपत्ति जताई है और केंद्र सरकार पर नेताजी का अपमान करने का आरोप लगाया है।
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