बंगाल के हावड़ा में झारखंड कांग्रेस के तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन बिक्सल को भारी कैश के साथ पकड़ा गया था। कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने झारखंड कांग्रेस के निलंबित विधायकों को 3 महीने की सशर्त अंतरिम जमानत दे दी है।
कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने झारखंड कांग्रेस के निलंबित विधायकों को तीन महीने की सशर्त अंतरिम जमानत दे दी है। बंगाल के हावड़ा में झारखंड कांग्रेस के तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन बिक्सल को 49 लाख कैश के साथ पकड़ा गया था। अदालत ने कहा है कि तीनों विधायकों को इस समयावधि में कोलकाता नगर पालिका क्षेत्र में ही रहना होगा।
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जस्टिस जॉयमाल्या बागची और अनन्या बंदोपाध्याय की खंडपीठ ने तीनों विधायकों को तीन महीने के लिए अंतरिम जमानत दी है। उन्हें इस अवधि के दौरान कोलकाता नगरपालिका क्षेत्र नहीं छोड़ने का निर्देश भी दिया गया है। अदालत ने कहा है कि इस समयावधि में वे शहर से बाहर नहीं जा सकते हैं। इसके अलावा निलंबित विधायकों को एक लाख रुपये का बांड जमा करना होगा और उन्हें सप्ताह में एक बार जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा। इसके अलावा खंडपीठ ने उन्हें अपने पासपोर्ट जमा करने का भी निर्देश दिया है।
इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय ने झारखंड कांग्रेस के तीन गिरफ्तार विधायकों द्वारा CBI को जांच सौंपने की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने इसके बजाय CID को निष्पक्ष तरीके से जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। झारखंड के तीन कांग्रेस विधायकों इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन बिक्सल कोंगारी को 31 जुलाई को हावड़ा में उनकी एसयूवी से 49 लाख रुपये से अधिक नकद जब्त करने के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद पश्चिम बंगाल सीआईडी ने हावड़ा ग्रामीण पुलिस से जांच अपने हाथ में ली थी।
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न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य ने मामले को सीबीआई या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी को स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि किसी मामले में आरोपी जांच एजेंसी का चयन नहीं कर सकता है। कोर्ट ने कहा था कि चूंकि पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में नकदी की जब्ती और गिरफ्तारी हुई है, इसलिए राज्य सीआईडी मामले की जांच करने की हकदार है।
विधायकों ने दावा किया था कि इस मामले में कथित तौर पर अन्य राज्य भी शामिल हैं और ऐसे में पश्चिम बंगाल पुलिस मामले की जांच नहीं कर सकती है। सीआईडी द्वारा जांच पर रोक लगाने की प्रार्थना भी कोर्ट में की गई थी, जिसे मंजूर नहीं किया गया। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने निर्देश दिया था कि सीआईडी द्वारा जांच जल्द से जल्द निष्पक्ष और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए।