फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

West Bengal: मनरेगा जॉब कार्ड का होगा सत्यापन, हाईकोर्ट ने दिया चार सदस्यीय समिति बनाने का आदेश

Thu, 18 Jan 2024 09:20 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

West Bengal: उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि मनरेगा के लिए वास्तविक जॉब कार्ड की सत्यापन प्रक्रिया चार अधिकारियों की एक समिति करेगी। इस प्रक्रिया को जिलेवार तरीके से किया जाएगा।
विज्ञापन
1 of 6
कलकत्ता उच्च न्यायालय। - फोटो : सोशल मीडिया
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार पश्चिम बंगाल में मनरेगा के जॉब कार्ड के सत्यापन के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन करने का आदेश दिया। यह समिति जिलेवार जॉब कार्ड का सत्यापन करेगी। अदालत में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी। जिसमें इस योजना के तहत वास्तविक श्रमिकों को मजदूरी देने की मांग की गई थी। 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 6
नरेंद्र मोदी, ममता बनर्जी - फोटो : सोशल मीडिया
केंद्र और राज्य सरकार का एक-दूसरे पर आरोप
पश्चिम बंगाल सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत राज्य को पैसा आवंटित नहीं कर रही है। जबकि, केंद्र का दावा है कि पहले दिए गए पैसे का गलत इस्तेमाल किया गया है और फर्जी जॉब कार्ड बनाए गए हैं। 
विज्ञापन

3 of 6
मनरेगा मजदूर। (सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया
चार सदस्यीय समिति में शामिल होंगे अधिकारी
उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि मनरेगा के लिए वास्तविक जॉब कार्ड की सत्यापन प्रक्रिया चार अधिकारियों की एक समिति करेगी। इस प्रक्रिया को जिलेवार तरीके से किया जाएगा। इस समिति में एक अधिकारी केंद्र सरकार, एक पश्चिम बंगाल सरकार, एक नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) से और एक महालेखाकार (पश्चिम बंगाल) कार्यालय से शामिल होंगे।

4 of 6
अदालत। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
25 जनवरी को होगी मामले में अगली सुनवाई
याचिका पर मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवागनानम की अध्यक्षता में खंडपीठ ने सुनवाई की। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि समिति जिलेवार तरीके से जॉब कार्ड का सत्यापन करेगी। प्रत्येक जिले में उप मंडल स्तर पर जॉब कार्ड का सत्यापन किया जाएगा। ताकि, मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाया जा सके। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि सुनवाई की अगली तारीख पर केंद्र, राज्य सरकार, कैग व महालेखाकार का कार्यालय अधिकारियों के नाम अदालत को सौंपेंगे। 25 जनवरी को मामले पर अगली सुनवाई होगी। पीठ ने निर्देश दिया कि समिति इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाएगी।
विज्ञापन

5 of 6
मनरेगा - फोटो : सोशल मीडिया
अदालत में केंद्र और राज्य सरकार ने क्या कहा
केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अशोक कुमार चक्रवर्ती ने अदालत को बताया कि मनरेगा योजना 2005 में संसद के एक अधिनियम द्वारा शुरू की गई थी। इसमें कहा गया था कि राज्य सरकारें काम को पूरा कराएंगी। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर पर्यवेक्षकों ने साजिश के तहत लोगों को नियोजित (मनरेगा का काम) किया। उन्होंने दावा किया कि राज्य को मनरेगा के लिए पहले ही धनराशि आवंटित की जा चुकी है और उसका गलत इस्तेमाल किया गया था। वहीं, राज्य सकार की ओर से महाधिवक्ता किशोर दत्ता पेश हुए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र की ओर से पैसे का आवंटन नहीं किया गया। जिसके कारण बंगाल में मनरेगा योजना वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 में लागू नहीं की जा सकी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
इंडियन सेक्युलर फ्रंट (सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया
अदालत ने आईएसएफ को दी रैली की अनुमति
वहीं, उच्च न्यायालय ने आज इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) को उसके स्थापना दिवस पर शहर के विक्टोरिया हाउस के सामने रैली आयोजित करने की भी अनुमति दी। रैली 21 जनवरी को होनी है। अदालत ने निर्देश दिया कि इसमें हिस्सा लेने वाले लोग अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे और हिंसा को नहीं भड़काएंगे। न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता (राजनीतिक दल आईएसएफ) को 21 जनवरी को अपने स्थापना दिवस पर एक बैठक आयोजित करने की अनुमति दी जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें