फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Calcutta High Court: टीएमसी विधायक को मिली अग्रिम जमानत, 2021 के चुनाव के बाद BJP कार्यकर्ता की हत्या का मामला

Thu, 21 Aug 2025 10:58 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।

सार

Calcutta High Court: कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी विधायक परेश पॉल और दो अन्य नेताओं को बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या के मामले में अग्रिम जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि अगर फिर गिरफ्तारी होती है तो एक-एक लाख के मुचलके और दो जमानतदारों के साथ जमानत मिलेगी। कोर्ट ने तीनों को पीड़ित के परिवार से दूर रहने, गवाहों को न डराने और देश न छोड़ने का आदेश दिया।
विज्ञापन
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक परेश पॉल और दो अन्य पार्टी नेताओं को भाजपा कार्यकर्ता की हत्या के मामले में अग्रिम जमानत दी। यह मामला 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा से जुड़ा है और सीबीआई इसकी जांच कर रही है।
विज्ञापन


जस्टिस जय सेनगुप्ता ने आदेश में कहा कि अगर इन तीनों को गिरफ्तारी होती है, तो उन्हें एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें दो जमानती पेश करने होंगे, जिनमें से एक स्थानीय निवासी होना जरूरी है।

कोर्ट ने  परेश पॉल और बाकी दोनों गवाहों को यह भी निर्देश दिया कि डराने-धमकाने की कोशिश न करें और उस गली में न जाएं, जहां मृतक अभिजीत सरकार की मां और भाई रहते हैं, जब तक मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: तुर्किये की कंपनी सेलेबी ने वापस ली याचिका, 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान रद्द हुई थी सुरक्षा मंजूरी

जस्टिस सेनगुप्ता ने यह भी सख्त हिदायत दी कि परेश पॉल कोई उकसाने वाला भाषण न दें, खासकर मृतक अभिजीत सरकार के परिवार के बारे में कोई बयानबाजी न करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि तीनों आरोपी देश छोड़कर नहीं जा सकते, जब तक उन्हें निचली अदालत से अनुमति न मिले। साथ ही, उन्हें सुनवाई की हर तारीख पर अदालत में हाजिर होना होगा।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने यह फैसला इसलिए दिया क्योंकि सीबीआई के पास जो सबूत थे, वे पहली पूरक आरोपपत्र दायर  करते समय भी मौजूद थे, लेकिन तब सीबीआई ने इन्हें आरोपी नहीं बनाया था। बाद में, लगभग चार साल बाद दूसरा आरोपपत्र दायर किया गया। कोर्ट ने यह भी माना कि इन तीनों ने जांच के दौरान सहयोग किया है, इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत दी जाती है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें