राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग ने दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों के द्वारा एक अनुसूचित जाति के परिवार को पीड़ित किए जाने के आरोप पर नोटिस जारी किया है। आयोग ने कहा है कि इस मामले में 15 दिनों के अंदर उसके सामने एक्शन टेकेन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। रिपोर्ट न आने पर अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेशी का आदेश दिया जा सकता है।
पुलिस पर थाने में बुलाकर अभद्रता का आरोप
रंजीत नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले एक परिवार ने आरोप लगाया है कि उनके नियोक्ता की तरफ से गलत आरोप लगाने के बाद रंजीत नगर थाने की पुलिस ने उन पर कार्रवाई की। इस कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने उन्हें लगातार तीन दिनों तक थाने में बुलाकर उनके साथ अभद्रता की। परिवार का आरोप है कि उन्हें जातिगत शब्दों के द्वारा अपमानित किया गया। आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए थाने के आरोपी अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील अजय कुमार पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि शिकायतकर्ता विकास, उसकी बहन नेहा और अन्य परिवार जनों को रंजीत नगर थाने के पुलिसकर्मियों ने प्रताड़ित किया है। उनके अनुसार परिवार के लोगों को अवैध हिरासत में रखकर पूरे-पूरे दिन प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस का यह व्यवहार मानवीय गरिमा के विरुद्ध है। उन्होंने इसमें जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। आयोग ने स्थानीय डीसीपी और जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।