भारतीय रेलवे में पानी की कमी पर एक लाख से ज्यादा शिकायतें- रिपोर्ट
वहीं दूसरी बात सीएजी की रिपोर्ट में भारतीय रेलवे की बात करें तो रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय रेलवे को वित्तीय वर्ष 2022-23 में शौचालयों और वाश बेसिन में पानी की कमी के कारण कुल 1,00,280 शिकायतें मिलीं। इन शिकायतों में से लगभग 34 प्रतिशत मामलों में समस्या का समाधान तय समय से ज्यादा समय में किया गया। रिपोर्ट में साफ-सफाई और स्वच्छता पर 2018-19 से 2022-23 तक के पांच वर्षों का ऑडिट किया गया है। इसमें बताया गया है कि यात्रियों की संख्या ज्यादा होने के कारण स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम होती हैं बल्कि सफाई से यात्रियों का अनुभव भी बेहतर होता है।
इसके साथ ही लंबी दूरी की ट्रेनों में बायो-टॉयलेट की सफाई पर एक सर्वे किया गया जिसमें 2,426 यात्रियों से राय ली गई। पांच रेलवे जोन में यात्री संतुष्टि 50 प्रतिशत से ज्यादा रही, जबकि दो जोनों में यह मात्र 10 प्रतिशत से भी कम थी। शिकायतों का मुख्य कारण पानी की कमी बताया गया, जो कि रेलवे स्टेशनों पर पानी भरने में देरी या कमी के कारण होती है। इसे सुधारने के लिए रेलवे बोर्ड ने सितंबर 2017 में क्विक वाटरिंग अरेंजमेंट (QWA) की शुरुआत की। रिपोर्ट के अनुसार, 109 स्टेशनों में से 81 पर QWA चालू है, लेकिन बाकी 28 स्टेशनों पर फंड की कमी, ठेकेदार की धीमी गति और काम के स्थगित होने की वजह से 2 से 4 साल की देरी हो रही है।
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स्वच्छता पर खर्च और बजट का हिसाब
रिपोर्ट में बताया गया है कि रेलवे की स्वच्छता और सफाई के लिए जो बजट तय किया गया था, कुछ जोनों ने उससे ज्यादा खर्च किया, जबकि कुछ ने पूरा बजट इस्तेमाल नहीं किया। खासकर लिनन प्रबंधन और कोच की सफाई में खर्च ज्यादा हुआ। COVID-19 महामारी की वजह से कुछ जोनों ने बजट का कम इस्तेमाल किया। इसके साथ ही ऑटोमैटिक कोच वाशिंग प्लांट्स (ACWPs) का भी ऑडिट हुआ, जिसमें पाया गया कि ये प्लांट्स पूरी तरह से काम नहीं कर रहे। 24 प्लांट्स में से 8 खराब या रिपेयर में थे। इसकी वजह से 1,32,060 कोच बाहर के कॉन्ट्रैक्ट के जरिए धोए गए।