कृषि मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने की दिशा में सबसे अहम कदम लागत का डेढ़ गुना एमएसपी मुहैया कराया जाना है। इसमें पहला किसान की लागत कम हो, दूसरा पैदावार की सही कीमत, तीसरा पैदावार को बर्बादी से बचाना और चौथा खेती के अलावा भी वैकल्पिक काम तैयार हो। खरीफ की फसल में न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले साल की तुलना में प्रति क्विंटल 80 से 400 रूपये तक बढ़ाने की सिफारिशें कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने की थी।
सरकार ने सिफारिशों पर विचार कर इनमें संशोधन कर लागत से डेढ़ गुना एमएसपी मुहैया कराना तय किया है। माना जा रहा है कि कृषि मंत्रालय द्वारा कैबिनेट नोट तैयार कर लिया गया है और बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर विचार किया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि कृषि राज्य का विषय है, ऐसे में सरकार डेढ़ गुना एमएसपी के खर्च में थोड़ी हिस्सेदारी राज्यों की भी तय कर सकती है। हालांकि यह फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद लिया जाएगा।
गौरतलब है कि सरकार राज्य सरकारों को किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य में फर्क के लिए तैयार किए गए तीन विकल्पों में से एक को चुनने का मौका भी दे सकती है। इसमें भावांतर, बाजार आधारित योजना और निजी क्षेत्र के जरिए फसलों की खरीद शामिल है।