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कृषि मंत्रालय द्वारा तैयार किया कैबिनेट नोट, किसानों को होंगे यह बड़े फायदे

Sat, 30 Jun 2018 06:41 AM IST
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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किसानों को खरीफ फसलों को डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मुहैया कराने का ऐलान जल्द हो सकता है। अगले सप्ताह केंद्रीय कैबिनेट किसानों को राहत देने वाली बजट में की गई इस घोषणा पर निर्णय ले सकता है। कृषि मंत्रालय द्वारा तैयार की गई रूपरेखा और सिफारिशों को अगले बुधवार कैबिनेट द्वारा हरी झंडी दी जा सकती है।

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नीति आयोग और कृषि मंत्रालय द्वारा किसानों को राहत देने के लिए गत दिनों तीन फार्मूले भी सुझाए गए थे। जिन पर गहन चर्चा के बाद मंत्रालय उन्हें भी कैबिनेट के पास भेजने जा रहा है। मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक अगले बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में होने वाली कैबिनेट में डेढ़ गुना एमएसपी पर विचार किया जाएगा।

यह संभव है कि कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद निर्धारित नीति का ऐलान किया जाए। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार ने तय किया है कि अधिसूचित फसलों के लिए एमएसपी, उनकी लागत का कम से कम डेढ़ गुना घोषित किया जाएगा। इससे पहले बजट 2018-19 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किसानों को डेढ़ गुना एमएसपी खरीफ की फसलों से मुहैया कराए जाने की घोषणा की थी।

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कृषि मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने की दिशा में सबसे अहम कदम लागत का डेढ़ गुना एमएसपी मुहैया कराया जाना है। इसमें पहला किसान की लागत कम हो, दूसरा पैदावार की सही कीमत, तीसरा पैदावार को बर्बादी से बचाना और चौथा खेती के अलावा भी वैकल्पिक काम तैयार हो। खरीफ की फसल में न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले साल की तुलना में प्रति क्विंटल 80 से 400 रूपये तक बढ़ाने की सिफारिशें कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने की थी।

सरकार ने सिफारिशों पर विचार कर इनमें संशोधन कर लागत से डेढ़ गुना एमएसपी मुहैया कराना तय किया है। माना जा रहा है कि कृषि मंत्रालय द्वारा कैबिनेट नोट तैयार कर लिया गया है और बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर विचार किया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि कृषि राज्य का विषय है, ऐसे में सरकार डेढ़ गुना एमएसपी के खर्च में थोड़ी हिस्सेदारी राज्यों की भी तय कर सकती है। हालांकि यह फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद लिया जाएगा।
 
गौरतलब है कि सरकार राज्य सरकारों को किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य में फर्क के लिए तैयार किए गए तीन विकल्पों में से एक को चुनने का मौका भी दे सकती है। इसमें भावांतर, बाजार आधारित योजना और निजी क्षेत्र के जरिए फसलों की खरीद शामिल है।
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