भारत में C-130J की मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली की तैयारी
लॉकहीड मार्टिन की तरफ से जारी बयान के मुताबिक इस एलान से भारत के डिफेंस और एयरोस्पेस क्षमताओं को बढ़ाने के साथ-साथ भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। उस समझौते के तहत भारतीय वायु सेना के पास मौजूद 12 C-130J के मौजूदा बेड़े के साथ-साथ दूसरे देशों द्वारा संचाचिल होने वाले सुपर हरक्यूलिस बेड़े की मेंटेनेंस के लिए भारत में एक मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) फैसिलिटी तैयार की जाएगी। यह भारत में किसी प्रमुख विमान बनाने वाले कंपनी की तरफ से तैयार की जाने वाली पहली एमआरओ फैसिलिटी है और यह 23 देशों के 27 ऑपरेटरों के सी-130जे बेड़े को भी सुविधा देगी। कंपनी ने बताया कि अमेरिकी और भारत की मंजूरी मिलने के बाद भारतीय वायुसेना की मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) प्रोग्राम की जरूरतों को देखते हुए भारत में C-130J की मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली भी की जाएगी।
हैदराबाद में बनते हैं C-130J के पार्ट्स
अगर लॉकहीड मार्टिन भारत में C-130J की मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली की बात कर रही है कि तो इसका मतलब यह है कि कंपनी भारत में अतिरिक्त उत्पादन और असेंबली क्षमता भी तैयार करेगी। हालांकि, लॉकहीड कंपनी अमेरिका और दूसरे देशों के ऑपरेटरों के लिए अमेरिका में जॉर्जिया के मेरिट्टा में भी सुपर हरक्यूलिस प्रोडक्शन फैसिलिटी में सी-130जे को बनाना जारी रखेगी। लॉकहीड मार्टिन और टाटा के बीच पहले से ही 'टाटा लॉकहीड मार्टिन एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड' (टीएलएमएएल) नाम से एक जॉइंट वेंचर भी है, जिसकी स्थापना 2010 में हुई थी, और हैदराबाद में बने इस प्लांट में C-130J के पार्ट्स बनाए जाते हैं, जिन्हें लॉकहीड मार्टिन ग्लोबल सप्लाई चेन के जरिए दूसरे देशों को भी भेजा जाता है। अभी तक, टीएलएमएएल ने 220 से अधिक सी-130जे एम्पेनेज की मैन्युफैक्चरिंग कर चुके हैं।
C-130J-30 सुपर हरक्यूलिस ने की थी दौलत बेग ओल्डी पर पहली बार लैंडिंग
बता दें कि भारत में पहला C-130J-30 सुपर हरक्यूलिस 2011 में आया था और 20 अगस्त 2013 को दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पट्टी (16614 फीट) दौलत बेग ओल्डी पर पहली बार लैंडिंग की थी। C-130J अभी भी IAF का मुख्य ट्रांसपोर्ट विमान है, जिसने कई महत्वपूर्ण मिशनों को अंजाम दिया है। इससे पहले 2008 में भारतीय वायुसेना के AN-32 कार्गो प्लेन की लैंडिंग कराई गई थी क्योंकि बीच में आए भूकंप की वजह से ग्राउंड की मिट्टी कमजोर हो गई थी। फिर उसे ठीक किया गया। इसके बाद यहां पर C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान को उतारा गया था। वहीं लद्दाख में पहली बार दौलत बेग ओल्डी एयरफील्ड पर पहला IAF C-130J सुपर हरक्यूलिस उतारने वाले शख्स एयर मार्शल तेजबीर सिंह थे, जो अब एयर फोर्स के मीडिया कॉर्डिनेशन सेंटर के ट्रेनिंग कमांड में वरिष्ठ एयर स्टाफ ऑफिसर हैं।
टाटा के लिए क्यों है फायदे का सौदा?
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर सुकरन सिंह ने बताया कि भारतीय वायुसेना के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) प्रोजेक्ट के लिए C-130J प्लेटफॉर्म प्रस्ताव पर लॉकहीड मार्टिन के साथ सहयोग करना टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम है। यह एलान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड को भारत में बड़े एयरक्राफ्ट प्लेटफॉर्म के लिए डिफेंस एमआरओ फैसिलिटी बनाने के लिए रास्ते खुलेंगे।
लॉकहीड मार्टिन में एयर मोबिलिटी और मैरीटाइम मिशन लाइन ऑफ बिजनेस के वाइस प्रेसिडेंट और जनरल मैनेजर रॉड मैकलीन ने कहा, सी-130जे को दुनिया के सबसे बड़े वर्कहॉर्स के रूप में जाना जाता है, न केवल अपनी वैश्विक उपस्थिति के लिए, बल्कि इसके इसके इंटरनेशनल सप्लाई चेन पार्टनर्स के लिए भी, जिसमें एम्पेनेज को हैदराबाद में टाटा लॉकहीड मार्टिन एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड मिल कर बनाते हैं। लॉकहीड मार्टिन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के बीच यह टीमिंग समझौता लॉकहीड मार्टिन की आत्मनिर्भर भारत के प्रति प्रतिबद्धता और भारत में हमारे भागीदारों और भारतीय उद्योग के साथ हमारे संबंधों में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
भारतीय वायुसेना को चाहिए 80 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट
भारतीय वायुसेना 80 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदने की योजना बना रही है और पिछले साल वायुसेना ने रिक्वेस्ट फॉर इनफॉरमेशन (RFI) भी जारी किया था। लॉकहीड मार्टिन ने आरएफआई का जवाब देते हुए और भारतीय वायुसेना को सी-130जे देने की पेशकश की थी। दोनों कंपनियां की नजर भारतीय वायुसेना के एमटीए प्रोग्राम पर है क्योंकि यह एक बड़ी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट डील है। भारतीय वायुसेना पुराने विमानों एएन-32 और आईएल-76 को रिप्लेस करना चाहती है। दिसंबर 2022 में भारतीय वायुसेना की तरफ से जारी आरएफआई में बताया गया था कि वह 18 से 27 टन भार वहन क्षमता वाले विमान खरीदने पर विचार कर रही है। इस सौदे के लिए तीन कंपनियां रेस में हैं, जिनमें लॉकहीड ने अपना C-130 विमान, एम्ब्रेयर ने अपना लेटेस्ट C-390 मिलेनियम और एयरबस ने अपना A-400 M एयरक्राफ्ट देने की पेशकश की थी। इनमें C-130 और A-400 M दोनों ही टर्बोप्रॉप हैं, जबकि C-390 में जेट इंजन है।
दूसरी तरफ, C-130J, जो C-130 का सबसे लेटेस्ट वर्जन है, इसमें 20 टन की एयरलिफ्ट क्षमता है। लेकिन C-390 भारतीय वायुसेना की तरफ से जारी आरएफआई की सभी जरूरतों को पूरा करता है, क्योंकि इसकी भार-वहन क्षमता 26 टन है। जबकि A-400M की एयरलिफ्ट क्षमता 37 टन है। शुरू में कहा जा रहा था कि सी-295, जिसे टाटा और एयरबस जिसे दोनों संयुक्त रूप से बनाते हैं, वह एएन-32 की जगह ले सकता है, जिनकी एयरलिफ्ट क्षमता समान है। लेकिन एमटीए को देखते हुए सी-295 भारतीय वायुसेना की तकनीकी जरूरतों पूरा नहीं कर पा रहा था।