क्या क्या हुआ ?
लेकिन भीड़ कुछ सुनने को तैयार नहीं थी और पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद योगेश राज नामक व्यक्ति आदि लोगों के नेतृत्व में दोपहर करीब 13:35 बजे चौकी चिंगरावठी के सामने सड़क पर लगे जाम लगाए खड़े लोग और उग्र होने लगे।
मौके पर मौजूद एसडीएम स्याना और क्षेत्राधिकारी स्याना ने भीड़ को समझाने की कोशिश की, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया, कुछ लोगों को कोतवाली, स्याना चलकर एफआईआर की कॉपी लेने को भी कहा।
लेकिन वहां कुछ लोग भीड़ को भड़काते रहे जिसके बाद हालात काबू से बाहर हो गए। एफआईआर के मुताबिक भीड़ ने असलाह, लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया।
सुबोध कुमार सिंह की हत्या कैसे हुई?
प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह को गोली मार दी गई और उनकी लाइसेंसी पिस्तौल, तीन मोबाइल फोन छीनकर ले गए। इसके बाद वो लगातार फायरिंग करते रहे और वायरलेस सेट तोड़ दिए।साथ ही चौकी की निजी-सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया।
एफआईआर में लिखा गया है कि ये घटनास्थल स्याना-बुलंदशहर लोकमार्ग पर स्थित है, जिस पर घटना के समय कई लोग आ-जा रहे थे। इस दौरान अराजकता का माहौल बन गया और लोग इधर-उधर भागने लगे थे। जब क्षेत्राधिकारी स्याना अपनी जान बचाने के लिए चौकी में घुसे तो भीड़ उग्र हो गई और मारो-मारो का शोर करते हुए चौकी में भी आग लगा दी।
इस दौरान पुलिसकर्मी घायल पड़े सुबोध कुमार सिंह को इलाज के लिए सरकारी वाहन में बैठाने लगे तो भीड़ ने दोबारा हमला कर दिया। इसमें पुलिसवालों को काफी चोटें आईं और सामने कॉलोनी के लोग घरों के खिड़की-दरवाजे बंद कर छिप गए।
कमरे में बंद पुलिसकर्मियों ने अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की, जिन्होंने कुछ देर बाद वहां पहुंचकर दरवाजा तोड़ा और इन लोगों को बाहर निकाला।घायल प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह को सीएचसी लखावटी (औरंगाबाद) ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
एफआईआर में इस बात का भी जिक्र है कि पुलिस ने भीड़ का तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया, जिसमें रायफल और एक राउंड हवाई फायर किया गया।