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Rajya Sabha: 'राज्यों के बीच सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती', नदी जोड़ो परियोजना पर राज्यसभा में केंद्र का जवाब

Mon, 21 Jul 2025 06:22 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नदी जोड़ो परियोजनाएं भारत के कई हिस्सों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। लेकिन इनका सफल क्रियान्वयन तभी संभव होगा जब सभी राज्यों के बीच आपसी समझ और सहयोग हो। केंद्र सरकार ने यह साफ किया है कि राज्यों की सहमति के बिना कोई भी बड़ी परियोजना आगे नहीं बढ़ सकती।
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राज्यसभा की कार्यवाही - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने माना है कि भारत में नदी जोड़ो (इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर्स- आईएलआर) परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा राज्यों के बीच आपसी सहमति बनाना है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है राज्यों की पानी बांटने को लेकर आशंकाएं। राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि नदी जोड़ो परियोजनाओं की सफलता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि संबंधित राज्य आपस में सहमत होते हैं या नहीं। मंत्री ने कहा 'राज्यों के बीच सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि उन्हें पानी के बंटवारे को लेकर आपत्तियां हैं।'
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30 में से पांच प्रमुख परियोजनाओं को प्राथमिकता
राष्ट्रीय दृष्टिकोण योजना के तहत 30 नदी जोड़ो योजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें से 5 परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। इन प्रमुख योजनाओं में सबसे आगे है केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी), जो वर्तमान में कार्यान्वयन की स्थिति में है।
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क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना?
इसकी अनुमानित लागत ₹44,605 करोड़ रुपये है, जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सिंचाई सुविधा करीब 10.6 लाख हेक्टेयर भूमि तक पहुंचेगी। वहीं इसकी मदद से करीब 62 लाख लोग पेयजल का लाभ उठा पाएंगे। जबकि ऊर्जा उत्पादन की बात करें, तो इससे 103 मेगावाट हाइड्रोपावर और 27 मेगावाट सोलर ऊर्जा पैदा होगी। इस परियोजना के मार्च 2030 पूरे होने का लक्ष्य रखा गया है।
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अन्य महत्वपूर्ण नदी जोड़ो योजनाएं
  • परिवर्तित परबती-कालिसिंध-चंबल (पीकेसी) लिंक परियोजना- ये संयुक्त रूप से मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरफ से संचालित है। इससे 6 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। वहीं इस योजना से राजस्थान के 21 जिले और मध्य प्रदेश के 15 जिले में पेयजल का लाभ मिलेगा। जबकि दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर को भी लाभ मिलेगा।
  • गोदावरी-कावेरी लिंक योजना- छत्तीसगढ़ के इंद्रावती उप-घाटी से अप्रयुक्त पानी को दक्षिण भारत में पहुंचाना इस योजना का मकसद है। इससे 6.78 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। वहीं पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए 2.1 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे।
  • कोसी-मेची लिंक योजना (बिहार) - कोसी नदी की बरसात में अधिक जल को मेची नदी की ओर मोड़ना इस योजना का उद्देश्य है। इससे 2.1 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसका उद्देश्य कोसी नदी की बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करना है।
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