बता दें कि मिनिमम वेज कोड बिल को 2019 में ही पास कर दिया गया था। कोरोना काल के दौरान इसमें कुछ संशोधन भी किए गए थे। इस बिल में पति, पत्नी और उनके दो बच्चों को एक श्रमिक परिवार का मानक माना गया था। इसके जरिये प्रतिदिन एक सदस्य पर के खाने-पीने एवं अन्य जरूरतों को शामिल किया गया था। इसमें बच्चों की शिक्षा का खर्च, चिकित्सा पर होने वाला व्यय एवं आकस्मिक व्यय को भी जोड़ा गया था। इन सब के आधार पर न्यूनतम मजदूरी और वेतन की गणना का हिसाब तय किया गया था। ये हर राज्यों के अनुसर अलग-अलग हो सकते हैं।
बता दें कि इसमें अस्थायी तौर पर काम करने वाले कर्मचारियों उबर, ओला, स्विगी और जोमोटो जैसे विभिन्न ई-कॉमर्स व्यवसायों से जुड़े कर्मचारी शामिल होते हैं। इन्हें काम के आधार पर भुगतान किया जाता है।