मोदी सरकार के अंतरिम बजट से महिलाएं काफी उम्मीदें लगाई बैठी थीं। लेकिन इस बजट से आधी आबादी अपने को ठगा सा महसूस कर रही हैं। चुनावी साल बजट में कोई खास लुभावनी घोषणा नहीं होने से वह काफी निराश हैं। जबकि वर्ष 2018 के बजट में मोदी सरकार ने महिलाओं पर खास फोकस किया था। आम महिलाओं की नजर में टैक्स से छूट में लाभ मिलने से उनके घर के बजट पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।
ज्योति नागपाल जो कि हाउस वाइफ हैं ने कहा कि सरकार ने आयकर में छूट सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है। यह अच्छा कदम है, लेकिन स्लैब में बदलाव नहीं किए गए हैं। 5 लाख रुपये से पचास बढ़ते ही टैक्स के दायरे में आ जाएंगे। हर साल महिलाओं के लिए सरकार से पिटारे से कुछ न कुछ निकलता था। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं, जिससे कि घर के बजट को बढ़ने से रोका जा सके।
सोनिया बवेजा जो कि कामकाजी महिला हैं ने कहा कि नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए इस बजट में आयकर सीमा में छूट के अलावा कुछ नहीं है। महिलाओं के लिए रोजमर्रा की काम आने वाली वस्तुओं को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई। इससे घर के बजट को कैसे संभालेंगे पता नहीं।
आस्था सिन्हा जो कि कामकाजी महिला हैं ने कहा कि महिलाओं के लिए वैसे तो बजट में कुछ खास नहीं है। लेकिन नए आइडिया और स्टॉर्टअप के लिए जो सरकार की सोच है उससे रोजगारों की उपलब्धता बढ़ेगी। महिलाओं के घरेलू बजट को लेकर इस बजट में कोई घोषणा नहीं है।