नरेन्द्र मोदी सरकार 2.0 के पहले बजट में सरकार ने समर्पित माल ढुलाई गलियारा परियोजना को 2022 तक पूरा करने का वादा किया है। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में 2019-20 का केन्द्रीय बजट पेश करते हुए कहा कि तेज विकास को सुनिश्चित करने के साथ ट्रैकों, रॉलिंग स्टॉक के निर्माण को पूरा करने और यात्री सेवाओं में सुधार के लिए बजट में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का प्रस्ताव रखा गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि अनुमान है कि 2018-2030 के बीच रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। इसे देखते हुए रेलवे की पूंजी लागत प्रति वर्ष 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपये की गई है। साथ ही, रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण का व्यापक कार्यक्रम इस वर्ष से शुरू किया जाएगा। साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि हम 2022 तक डेडिकेटेड फ्रैट कोरिडोर परियोजना को पूरा कर लेंगे, जो रेल यात्रियों के लिए मौजूदा रेलवे नेटवर्कों को मुक्त रखेगी।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि भारतीय रेल की लोकल और लंबी दूरी वाली सेवाएं मुंबई जैसे महानगरों और छोटे शहरों में शानदार काम कर रही हैं। साथ ही, रेलवे को दिल्ली-मेरठ मार्ग पर प्रस्तावित रैपिड रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसी विशेष प्रयोजन साधन संस्थाओं के लिए उप-शहरी रेलवे में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।