सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है जिसमें उत्तर प्रदेश के एक डीम्ड विश्वविद्यालय शुरू किए गए बेसिक टीचर्स सर्टिफिकेट(बीटीसी) कोर्स को निरस्त करने का निर्देश दिया गया था। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन(एनसीटीई) की शर्तों व नियमों का पालन किए बगैर इस विश्वविद्यालय ने बीटीसी कोर्स की शुरुआत की थी। न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को सही करार दिया है। साथ ही पीठ ने कोर्स में दाखिला लेने वाले सभी छात्रों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा देने के फैसले को भी सही ठहराया है।
पीठ ने कहा है कि वर्ष 2008-09 और वर्ष 2009-10 केलिए बीटीसी कोर्स में छात्रों का दाखिला सही नहीं था। उनकी डिग्री को वैध नहीं ठहराया जा सकता। इन दोनों सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए यह प्रताडना समान है। यह मामला नेहरू ग्राम भारती यूनिवर्सिटी द्वारा वर्ष 2008-09 और वर्ष 2009-10 केलिए बीटीसी कोर्स से संबंधित है।
स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रैनिंग(एससीईआरटी) केनिदेशक ने इस कोर्स को निरस्त कर दिया था। इसकेबाद हाईकोर्ट ने इस फैसले को सही बताते हुए कहा था कि इस डीम्ड यूनिवर्सिटी ने एनसीटीई की शर्तों का पालन किए गए बीटीसी कोर्स शुरू की। लिहाजा डीम्ड यूनिवर्सिटी की द्वारा शुरू किया गया यह कोर्स वैध नहीं है। त्र्हाईकोर्ट केइस फैसले को डीम्ड यूनिवर्सिटी ने चुनौती दी थी।