फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Lok Sabha Election: नीतीश का NDA में आना और यूपी में मायावती के जोखिम से भाजपा का बचना, पहले से तय था ये संयोग

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 09 Mar 2024 02:00 PM IST

सार

शनिवार को बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा, हम लोकसभा चुनाव अकेले अपने बलबूते पर पूरी तैयारी व दमदारी के साथ लड़ रहे हैं। ऐसे में चुनावी गठबंधन या तीसरा मोर्चा आदि बनाने की अफवाह फैलाना यह घोर फेक व गलत न्यूज है...
विज्ञापन
विज्ञापन
Lok Sabha Election: Mayawati - फोटो : Amar Ujala/ Rahul Bisht


मायावती और नीतीश कुमार की स्थिति तय थी

अमर उजाला डॉट कॉम ने चार जनवरी को 'Lok Sabha election: किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी बसपा, यूपी में एनडीए को मायावती से नुकसान नहीं' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। यह खबर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े सूत्रों के हवाले से लिखी गई थी। सूत्रों ने तब संकेत दिया था कि देर सवेर नीतीश कुमार, एनडीए में वापसी कर सकते हैं। हालांकि सूत्रों ने कहा था कि नीतीश कुमार, अगर एनडीए में शामिल होना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। इसके लिए पार्टी अपनी तरफ से कोई पहल नहीं करेगी। अगर कोई खुद से और बिना शर्त पार्टी में शामिल होने की इच्छा जाहिर करता है, तो उस पर विचार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में मायावती, भगवा टोली के लिए जोखिम का कारण नहीं बनेंगी। तब 'जेडीयू' को लेकर ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि नीतीश कुमार, देर सवेर एनडीए का दामन थाम सकते हैं। उस वक्त इंडिया गठबंधन में भी नीतीश कुमार की कोई बड़ी भूमिका तय नहीं हुई थी। कुछ दिन बाद ही नीतीश कुमार, एनडीए में शामिल हो गए।

यूपी में बसपा से भगवा टोली को नुकसान नहीं

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के सूत्रों ने यूपी में बसपा की भूमिका को लेकर कहा था, वहां पर हमें कोई नुकसान नहीं है। यूपी में मायावती, किसी भी समूह में शामिल न होकर अलग से चुनाव लड़ती हैं, तो उस स्थिति में भगवा टोली को कोई नुकसान नहीं होगा। यूपी में मायावती का अपने बलबूते लोकसभा चुनाव लड़ना, भाजपा के लिए फायदेमंद है। बसपा की मौजूदा राजनीतिक स्थिति ऐसी नहीं है कि इसके नेता लोकसभा चुनाव के लिए कोई बड़ा निर्णय लें। उनके लिए दिल्ली की सियासत से ज्यादा यूपी में खोई हुई जमीन वापस लेना है। ऐसे में लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा, भाजपा के लिए किसी जोखिम का कारण नहीं बनेगी। दूसरी तरफ बसपा प्रमुख मायावती ने नववर्ष पर अपने संदेश में कहा था, देशवासी इस वर्ष लोकसभा चुनाव में सर्वजन हितैषी सरकार बनाने का प्रयास करें।



मायावती ने दी थी ये नसीहत

उन्होंने सरकार को भी रोजगार की गारंटी सुनिश्चित कर सच्ची देशभक्ति का परिचय देने और राजधर्म का निर्वाह करने की नसीहत दी। लोगों की जेब में खर्च के लिए पैसे न हों तो देश के विकास का ढिंढोरा कैसा व लोगों के किस काम का है। बेरोजगारों की भारी फौज के साथ 'विकसित भारत' कैसे संभव है। मायावती ने कहा था, भाजपा की केंद्र व राज्य की सरकारें हों या कांग्रेस सहित विपक्ष के गठबंधन की राज्य सरकारें, दोनों ही जबरदस्त महंगाई, विकराल रूप धारण करती गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन जैसी बुनियादी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहीं हैं। सिर्फ लोगों का ध्यान बंटाने के लिए अलग-अलग प्रकार की 'गारंटी' वितरण में लगी हैं। बसपा प्रमुख ने कहा था, पहले कांग्रेस और अब भाजपा की लंबी चली जातिवादी, अहंकारी, गैर समावेशी सरकार के दुष्प्रभाव से गरीबों का विकास लगातार बाधित हो रहा है। उससे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव में किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनने की बात कही थी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बसपा किसी भी खेमे में शामिल नहीं होगी।

विरोधी लोग काफी बैचेन लगते हैं

मायावती ने शनिवार को 'एक्स' पर लिखा, यूपी में बीएसपी की काफी मजबूती के साथ अकेले चुनाव लड़ने के कारण विरोधी लोग काफी बैचेन लगते हैं। यही वजह है कि वे आए दिन किस्म-किस्म की अफवाहें फैलाकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास करते रहते हैं। बहुजन समाज के हित में बीएसपी का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला अटल है। सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें चल रही थीं कि मायावती, INDI गठबंधन का हिस्सा बन सकती हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा का मुकाबला करने के लिए इंडिया गठबंधन, मायावती को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next