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विपक्ष की बैठक: सोनिया बोलीं- सीएए पर मोदी-शाह कर रहे हैं देश को गुमराह

Mon, 13 Jan 2020 08:23 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नागरिकता कानून पर विपक्ष की बैठक जारी - फोटो : ANI
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कांग्रेस समेत देश के 20 विपक्षी दलों ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को वापस लेने और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पर रोक लगाने की मांग की है। विपक्षी दलों ने कहा कि वो सभी मुख्यमंत्री राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया को निलंबित करें जिन्होंने अपने राज्यों में एनआरसी लागू नहीं करने की घोषणा की है।

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया। अर्थव्यवस्था, रोजगार और किसानों की स्थिति व सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई और जेएनयू व कुछ अन्य विश्वविद्यालयों में छात्रों पर हमले को लेकर चिंता प्रकट की गई।

इन पार्टियों ने प्रस्ताव में कहा कि हम नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से अर्थव्यवस्था का पूरी तरह कुप्रबंधन किए जाने के कारण बड़ी संख्या में लोगों के सामने पैदा हुई जीविका की खतरनाक स्थिति को लेकर अपनी चिंता प्रकट करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार करने की बजाय सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है।
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विपक्षी दलों ने कहा कि सीएए, एनपीआर और एनआरसी एक पैकेज है, जो असंवैधानिक है तथा गरीब, दबे-कुचले लोग, अनुसूचित जाति-जनजाति और भाषायी व धार्मिक अल्पसंख्यक इसके मुख्य निशाने पर हैं।

क्या क्या कहा सोनिया ने 

  • सरकार लोगों का उत्पीड़न कर रही है, नफरत फैला रही है और हमारे लोगों को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने की कोशिश कर रही है। देश में उथल-पुथल मची हुई है। संविधान को कमजोर किया जा रहा है और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
  • मोदी-शाह ने सीएए और एनआरसी के नाम पर देश को गुमराह किया। 
  • युवा देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं इन्हें देश की जनता का समर्थन मिला हुआ है। इसका मुख्य कारण सीएए और एनआरसी है। इसे लेकर लोगों में निराशा और क्रोध है, जो अब सड़कों पर आ गया है। इस दौरान यूपी और दिल्ली में पुलिस द्वारा की गई प्रतिक्रिया चौंकाने वाली, पक्षपातपूर्ण और क्रूर है। 
  • जामिया, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, एएमयू और दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों के बाद भाजपा ने जेएनयू में भी आतंक दिखाया। मोदी-शाह की सरकार शासन करने और लोगों को सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। 

 

राहुल ने भी बोला हमला 

वहीं, राहुल गांधी ने भी कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में राहुल ने कहा कि युवाओं की समस्या से निपटने की बजाय लोगों के बांटने में जुटी है। युवाओं की शिकायत जायज है, इन्हें दबाया नहीं जाना चाहिए, सरकार को इनकी आवाज सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री को यूनिवर्सिटी जाने की चुनौती देता हूं। 

भाजपा का पलटवार 

वहीं, भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पलटवार करते हुए कहा कि इस बैठक में विपक्ष की एकता की पोल खुल गई। इसमें सपा, टीएमसी, बसपा, आप जैसी पार्टियां दूर रहीं। बैठक में आज जो प्रस्ताव पास हुए हैं उससे पाकिस्तान बहुत खुश होगा। 



20 दलों के नेता हुए शामिल

कांग्रेस द्वारा बुलाई गई इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और गुलाम नबी आजाद, भाकपा के डी राजा, रालोद के अजित सिंह सहित 20 दलों के नेता शामिल हुए। इस बैठक में शिवसेना, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस,  द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी शामिल नहीं हुई है।

मायावती ने बताया- बैठक से क्यों किया किनारा
मायावती ने ट्वीट कर कहा- राजस्थान कांग्रेसी सरकार को बसपा का बाहर से समर्थन दिये जाने पर भी, इन्होंने दूसरी बार वहां बसपा के विधायकों को तोड़कर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करा लिया है जो यह पूर्णतया विश्वासघाती है। ऐसे में कांग्रेस के नेतृत्व में आज विपक्ष की बुलाई गई बैठक में बसपा का शामिल होना, यह राजस्थान में पार्टी के लोगों का मनोबल गिराने वाला होगा। इसलिए बसपा इनकी इस बैठक में शामिल नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि वैसे भी बसपा सीएए और एनआरसी आदि के विरोध में है। केन्द्र सरकार से पुन अपील है कि वह इस विभाजनकारी व असंवैधानिक कानून को वापिस ले। साथ ही, जेएनयू व अन्य शिक्षण संस्थानों में भी छात्रों का राजनीतिकरण करना यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण है।

ममता ने भी किया इनकार 
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को साफ शब्दों में कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अकेले लड़ेंगी। सदन में ही उन्होंने विश्वविद्यालय परिसरों में हिंसा और सीएए के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा 13 जनवरी को बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक के बहिष्कार की घोषणा की थी।

बैठक में आम आदमी पार्टी शामिल नहीं हुई 
नागरिकता कानून और सीएए पर बुलाई गई विपक्ष की बैठक से आम आदमी पार्टी ने भी किनारा कर लिया। पार्टी ने कहा कि उसका कोई भी नेता इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगा।

ममता के किसी फैसले की जानकारी नहीं: कांग्रेस
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा था, ‘मुझे ममता बनर्जी के किसी फैसले की जानकारी नहीं है। जहां तक मुझे पता है, कांग्रेस पार्टी ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ संसद के भीतर और बाहर आवाज उठाई है और विपक्षी नेताओं को 13 जनवरी की बैठक में आने का न्योता दिया है। वह आएंगी या नहीं इस पर मैं कुछ नहीं कह सकता।’

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