भारत के उड्डयन मंत्रालय ने ड्रोन रखने वाले नागरिकों को 31 जनवरी तक पंजीकरण करवाने के लिए कहा है। साथ ही चेताया है कि इसके गैर पंजीकृत ड्रोन व उनके ऑपरेटरों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी सेना द्वारा ड्रोन का उपयोग कर की गई हत्या के बाद यह सख्ती कर रही है।
मंत्रालय ने कहा कि पंजीकरण पर ड्रोन स्वीकृति संख्या (डीएएन) व स्वामित्व स्वीकृति नंबर (ओएएन) दिए जाएंगे। यही ड्रोन व ऑपरेटर वैध माने जाएंगे। इन्हें ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं माना जाए, उसके लिए डीजीसीए से अनुमति लेनी होगी। वहीं बिना नंबर ड्रोन रखने पर कानूनी कार्रवाई होगी
उद्योग संगठन फिक्की की ड्रोन समिति के सहअध्यक्ष अंकित मेहता का अनुमान है कि भारत में 50 हजार से 60 हजार अनाधिकृत ड्रोन हैं।
आईपीसी 287, 336, 337 338 : अपनी लापरवाही व मशीनों के दुरुपयोग से मानव जीवन पर संकट पैदा करने या नुकसान पहुंचाने पर छह महीने से दो साल तक जेल व जुर्माना।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने 27 अगस्त 2018 को सीएआर जारी किया था जिसमें ड्रोन को यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) व अनमैन्ड एयरक्राफ्ट ऑपरेटर परमिट (यूएओपी) दिए जाते हैं। नो परमिट नो टेकऑफ नियम के तहत ड्रोन उड़ाने से पहले ऑपरेटर को डीजीसीए के ऑनलाइन सॉफ्टवेयर डिजीस्काई से अनुमति लेनी होती है।