तेलंगाना के पेद्दापल्ली विधानसभा क्षेत्र से बसपा की दसारी उषा नए अंदाज में चुनाव लड़ रही हैं। एक ओर जहां प्रदेश में कई उम्मीदवार रोजाना लाखों खर्च कर रहे हैं वहीं उषा घर-घर जाकर वोट मांगती हैं और साथ ही एक नोट भी। आईआईटी खड़गपुर से इलेिक्ट्रकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद उषा ने सिविल सेवा में जाने के लिए दिल्ली में तैयारी शुरू कर दी थी। इसी बीच वह कोरोना में वापस गांव आ गईं। दो साल से वह क्षेत्र में काम कर रही हैं। उषा का कहना है कि वह अब अपने समाज के लोगों के लिए काम करना चाहती हैं। अभिवादन में ‘जय भीम- जय फुले’ बोलने वाली 27 वर्षीय उषा चाहती हैं कि बहुजन समाज के लोग अपनी ताकत को पहचानें। बसपा की मुखिया मायावती प्रधानमंत्री बनें।
माता-पिता की शादी के बाद आईं समस्याएं
उषा का कहना है कि उनके पिता बी हनुमैय्या अपनी युवा अवस्था में कम्युनिस्ट पार्टी के लिए काम करते थे। उनके पिता जो कि बैकवर्ड क्लास की पदमशाली जाति से आते हैं, उन्होंने वढेरा जाति की उनकी माता से अंतरजातीय विवाह किया। गांव के लोगों ने इसका विरोध किया। वह गांव के बाहर एक छोटे से घर में अपना जीवन यापन करने के लिए रिक्शा चलाने लगे। उनकी माता ने भी इस दौरान ईंट भटठे पर ईंट बनाने का काम किया। उषा ने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग पूरी की। बड़ी बहन आईआईटी धनबाद से एमएससी है और अब अमेरिका में हैं। छोटा भाई भी एमबीए करने के बाद अमेरिका में ही नौकरी कर रहा है।
वे पैसे से हराना चाहते हैं, मेरी जनता का दिल जीतने की इच्छा
उषा का कहना है कि उनके सामने वाले प्रतिद्वंदी चुनाव में खूब पैसा खर्च कर रहे हैं। वह पैसे से हराना चाहते हैं जबकि मैं जनता का दिल जीतना चाहती हूं। हर घर से वोट के साथ एक नोट मांगने के पीछे की मंशा भी यही है कि सबको यह चुनाव अपना लगे। ऐसा नहीं लगे कि उनकी वोट को कोई खरीद लेगा बल्कि उनके अहसास हो कि उनका छोटा सा योगदान बड़ा काम कर सकता है।