सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान, हिमालय की चार ऊंची चोटियों को फतह करने निकले हैं। 34 दिवसीय इस अभियान में 35 सदस्य शामिल हैं। शनिवार को देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला स्थित 'सीमा सुरक्षा बल साहसिक एवं उन्नत प्रशिक्षण संस्थान से चार गगनचुंबी पर्वत चोटियों को विजित करने को संकल्पित बीएसएफ महत्वाकांक्षी पर्वतारोही दल को इस लक्ष्य के लिए रवाना किया गया। इस अभियान दल को बीएसएफ के आईजी (प्रशिक्षण) अशोक कुमार, आईपीएस ने झंडी दिखाई। यह अभियान दल हिमालय के जिन चार ऊंची चोटियों को फतह करने निकला है, उनमें लाहौल और लद्दाख क्षेत्र में माउंट युनम (6111 मीटर), माउंट थुग्जे (6128 मीटर), माउंट थुग्जे पूर्व (6080 मीटर) और माउंट मेंटोक (6250 मीटर) शामिल हैं।
'हम फिट तो इंडिया फिट' अभियान
बीएसएफ के मुताबिक, इस अभियान के दो उद्देश्य हैं, पहला 1995 में नुब्रा घाटी, काराकोरम रेंज में माउंट सासेर कांगड़ी( 17672 मीटर) के पर्वतारोहण अभियान के दौरान अपनी जान गंवाने वाले बल के 13 पर्वतारोहियों को श्रद्धांजलि देना है और दूसरा उद्देश्य-'स्वच्छ भारत-स्वच्छ हिमालय' सहित 'हम फिट तो इंडिया फिट' अभियान का नेतृत्व करना है। इस 34 दिवसीय अभियान दल में पर्वतारोही, सहायक कर्मचारी, चिकित्सा कर्मचारी और परिवहन कर्मचारी सहित कुल 35 सदस्य शामिल हैं। सीमा सुरक्षा बल का यह अभियान पर्वतारोहियों की आरोहण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 6000 मीटर ऊंची 04 चोटियों पर एडवांस हाई एल्टीट्यूड अल्पाइन प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य को सफल बनाएगा।
डिप्टी कमांडेंट लवराज सिंह धर्मशक्तु कर रहे नेतृत्व
इस अभियान में दिग्गज और प्रख्यात पर्वतारोहियों के अनुभव के साथ ही नए पर्वतारोहियों की सामूहिक ऊर्जा है। नारी सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को जाहिर करते हुए सीमा सुरक्षा बल ने महिला प्रहरियों को भी इस अभियान दल में शामिल कर रखा है। अभियान दल का नेतृत्व विश्व विख्यात पर्वतारोही और सीमा सुरक्षा बल के डिप्टी कमांडेंट लवराज सिंह धर्मशक्तु कर रहे हैं, जो माउंट एवरेस्ट को सात बार फतह कर चुके हैं।
पर्वतारोहण शिविरों से कचरा इकट्ठा करेंगे
हिमालय की उचाईयों को अछूता और कचरा-मुक्त रखने के पवित्र सिद्धांत का पालन करते हुए, दल के सदस्य 14,000 फीट से लेकर 20,500 फीट की ऊंचाई तक के ऊंचे पर्वतारोहण शिविरों से भी कचरा इकट्ठा कर उसका उचित निपटान करना है। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग की रोकथाम का एक सशक्त संदेश फैलाना तो है ही, साथ ही पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स को "स्वच्छ भारत - स्वच्छ हिमालय" और "हम फिट तो इंडिया फिट" पहल के प्रति भी संवेदनशील बनाना है।
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पर्वतारोहण में बीएसएफ का गौरवशाली इतिहास
आज वस्तुस्थिति यह है कि रोमांच की खोज और अज्ञात का आकर्षण सीमा प्रहरियों के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। पर्वतारोहण इसी उद्दाम भावना की परिणति है जो नेतृत्व, सौहार्द, अनुशासन, जिम्मेदारी की भावना, आत्मविश्वास और सबसे बढ़कर, अत्यंत प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में कुशलतापूर्वक कार्य करने की क्षमता जैसे आवश्यक गुणों के विकास के लिए एक अद्वितीय मंच उपलब्ध कराता है। उल्लेखनीय है कि पर्वतारोहण के क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल का गौरवशाली इतिहास रहा है।
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दो राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार विजेता सदस्य भी शामिल
इस प्रतिष्ठित पर्वतारोही दल में एक पद्मश्री और दो राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार विजेता सदस्य शामिल हैं। गौरतलब है कि सीमा सुरक्षा बल के नाम पर्वतारोहण के क्षेत्र में 2006 और 2018 में माउंट एवरेस्ट, 2008 में दुर्जेय माउंट कंचनजंगा, 2021 में माउंट ल्होत्से, 2023 में माउंट मनास्लु और 47 अन्य हिमालयी चोटियों पर सफल आरोहण सहित अनेक गौरवमयी उपलब्धियां शामिल हैं।