बीएसएफ प्रवक्ता के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से 150 गज दूरी पर (कहीं-कहीं यह दूरी ज्यादा भी है) तारबंदी लगाई गई है। चूंकि अब गेहूं की फसल काटी जा रही है, इसलिए पंजाब में अनेक किसान तारबंदी के उस पार पड़ने वाले अपने खेतों में रोजाना आते जाते हैं।
जाब के सरहदी गांवों में रहने वाले ये किसान हार्वेस्टर, ट्रैक्टर और अन्य उपकरण लेकर खेतों में पहुंचते हैं।
ये किसान जब वहां पहुंचते हैं, तो तारबंदी से पहले इन्हें रोक लिया जाता है। कोरोना महामारी के मद्देनजर बीएसएफ के जवान, किसानों को संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें कई जरूरी हिदायतें देते हैं। सबसे इनके हाथों को साबुन से धुलवाया जाता है। कई बार सैनिटाइजर का इस्तेमाल होता है।
इसके बाद कृषि मशीनरी एवं दूसरे टूल्स को सैनिटाइज किया जाता है। किसानों को अपने कार्य के दौरान कितना फासला यानी सामाजिक दूरी बनाए रखनी है, यह जानकारी दी जाती है। ये सब औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही उन्हें तारबंदी से आगे जाने देते हैं।
बीच में जब कभी किसी किसान को पानी पीने या खाने के लिए आना होता है तो वह बीएसएफ जवान के पास आ जाता है। जवान उसके हाथ साफ कराता है। किसानों के ट्रैक्टर और कंबाइन मशीनों को रोजाना डिसइन्फेक्शन किया जा रहा है।