येदुयेरप्पा के खिलाफ कांग्रेस ने गोनी मलथेश को और जद(एस) ने एच टी बालेगर को मैदान में उतारा है। शिकारीपुरा क्षेत्र में सबसे ज्यादा तादाद लिंगायतों की है। इसके बाद कुरबा, मुसलमान और दलित मतदाताओं की संख्या है।
वोक्कालिंगा यहां कम हैं। शिक्षा विभाग में काम कर रहे नागराज येड्डी कहते हैं कि लिंगायतों की तादाद कुल आबादी की आधी से भी ज्यादा है और उनका एक मुश्त समथर्न येदुयेरप्पा के साथ है। इसके अलावा क्षेत्र के अन्य वर्गों के लोग भी येदुयेरप्पा को वोट देंगे क्योंकि अगर राज्य में भाजपा जीती तो वही मुख्यमंत्री बनेंगे।
लेकिन दूसरी तरफ थोड़ा आगे बढ़ने पर सैयद जाबिर और रियाजुद्दीन से मुलाकात होती है। येदुयेरप्पा की बढ़त से इन्हें भी इनकार नहीं है, लेकिन वह ये भी कहते हैं कि राह इस बार पहले जैसी आसान नहीं हैं। जाबिर के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस का बेहद कड़ा मुकाबला है। क्योंकि जहां मुस्लिम, कुरबा पूरी तरह कांग्रेस उम्मीदवार मलथेश के साथ एकजुट हैं, वहीं लिंगायतों में इस बार विभाजन है।
मलथेश भी लिंगायत हैं और सिद्धारमैया ने लिंगायतों को अल्पसंख्यक दर्जा देने का जो दांव चला है उससे उनके एक हिस्से का समर्थन कांग्रेस को भी मिल रहा है। जबकि दलित 50-50 फीसदी दोनों तरफ हैं, लेकिन अनुसूचित जनजाति नायक जिनकी अच्छी तादाद है, अभी असंमजस में हैं। पास खड़े शरीफुद्दीन बताते हैं कि येदुयेरप्पा के बेहद खास रहे स्थानीय लिंगायत नेता शांतवीर गौड़ा के कांग्रेस में आ जाने से भी कांग्रेस को फायदा हुआ है। इसी तरह एक और स्थानीय लिंगायत नेता जो कांग्रेस से भाजपा में चले गए थे, वापस कांग्रेस में आ गए हैं।
लेकिन शिक्षा विभाग से जुड़े नागराज येड्डी इससे सहमत नहीं हैं। वह कहते हैं कि येदुयेरप्पा सिर्फ शिकारीपुरा या शिवमोगा के ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के सबसे बड़े लिंगायत नेता हैं। इसलिए उनकी अपनी सीट पर लिंगायत उनको समर्थन न दें एसा इसका सवाल ही नहीं उठता। येड्डी कहते हैं कि येदुयेरप्पा का कद इतना बड़ा है कि उलटे उन्हें गैर लिंगायतों का भी अच्छा खासा समथर्न मिलेगा।