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कर्नाटक: अपने गृह जिले मंड्या में भी भाजपा को कोई फायदा नहीं पहुंचा पा रहे हैं एसएम कृष्णा

Wed, 09 May 2018 11:43 PM IST
विनोद अग्निहोत्री, मंड्या(कर्नाटक)
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पुराने मैसूर के इस जिले में क्या भाजपा इस बार अपना खाता खोल पाएगी या इस बार भी जिले की सातों विधानसभा सीटें कांग्रेस और जद(एस) के बीच ही बंटेंगी । कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे एस एम कृष्णा के तीन साल पहले पाला बदलकर भाजपा में आए थे तो पार्टी को यहां उनका लाभ मिलने की उम्मीद थी।
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लेकिन जिले की सभी सीटों पर कांग्रेस और जद(एस) के बीच सीधे मुकाबले की ही बात लोग कहते हैं। जबकि मंड्या कृष्णा का ही गृह जिला है और उन्होंने लंबे समय तक यहां राजनीति की है। लेकिन उनकी उम्र और राजनीतिक निष्क्रियता से भाजपा को एस एम कृष्णा का कोई लाभ मिलता नहीं दिख रहा है।

2013 के विधानसभा चुनाव में मंड्या की सात सीटों में जनता दल(एस) ने चार कांग्रेस ने दो और एक सीट रैयत संघ ने जीती थी। जद(एस) ने नागमंगला, श्रीरंगपट्टन, मडलूर, केआरपेटे सीटें जीतीं थी, जबकि मंड्या और मलवल्ली सीट कांग्रेस के खाते में गई थी और मेलुकोटे सीट पर रैयत संघ ने बाजी मारी थी। मंड्या से कांग्रेस के टिकट पर मशहूर कन्नड़ फिल्म अभिनेता अंबरीष चुने गए थे। लेकिन खराब सेहत का हवाला देकर अंबरीष इस बार मैदान में नहीं हैं। 
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हालांकि स्थानीय लोग यह भी कहते हैं की अंबरीष अभिनेता के स्टारडम से बाहर निकलकर नेता नहीं बन सके और वह अपने क्षेत्र के लोगों के लिए उपलब्ध नहीं रहते थे। उनसे मिलना टेढ़ी खीर था। इसलिए लोगों में उन्हें लेकर नाराजगी थी इसलिए हार के डर से उन्होंने खुद को मैदान से बाहर कर लिया।

कांग्रेस ने उनकी जगह रविडिगा गौड़ा को मैदान में उतारा है, जबकि जद(एस) से एम. श्रीनिवास मैदान में हैं। वहीं भाजपा के टिकट पर शिवान्ना उम्मीदवार हैं जो जद(एस) से पाला बदलकर भाजपा में आए हैं।
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मंड्या वोक्कालिंगा बहुल क्षेत्र है

जद(एस) उम्मीदवार के चुनाव प्रबंधक योगेश दावा करते हैं कि अंबरीष को लेकर जो नाराजगी स्थानीय लोगों में है उसका फायदा जद(एस) के एम. श्रीनिवास को मिल रहा है और उनकी जीत तय है। योगेश यह भी कहते हैं कि टक्कर कांग्रेस के उम्मीदवार से है और भाजपा तीसरे नंबर पर रहेगी, लेकिन जद(एस) पाला बदलने की वजह से भाजपा उम्मीदवार को पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं का पूरा सहयोग नहीं मिल रहा है। जिसका फायदा भी जद(एस) को मिलेगा। 

योगेश के मुताबिक मंड्या वोक्कालिंगा बहुल क्षेत्र है जो पूरी तरह से जद(एस) का जनाधार हैं और मुस्लिम मतदाताओं का भी एक बड़ा वर्ग उनके साथ है। जबकि कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे के वोटों में सेंधमारी कर रहे हैं। हालांकि भाजपा कार्यकर्ता कृष्णमूर्ति को लगता है कि मोदी के नाम आखिरी वक्त में वह चुनाव नतीजे बदल सकते हैं।

लेकिन कांग्रेस समर्थक हरीश का दावा उससे उलट है। हरीश कहते हैं कि अंबरीष को लेकर स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की जो नाराजगी थी, प्रत्याशी बदलने से वो दूर हो गई है। साथ ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किसानों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के लिए जो कल्याणकारी योजनाएं शुरू की उससे इन वर्गों का पूरा समर्थन कांग्रेस को है। साथ ही वोक्कालिंगा समुदाय के भी बड़े हिस्से का समर्थन कांग्रेस को मिल रहा है। 

योगेश की ही तरह हरीश भी कांग्रेस उम्मीदवार की जीत का दावा करते हैं। वो भी मानते हैं कि मुकाबला जद(एस) से है और भाजपा उम्मीदवार तीसरे नंबर पर है। आम लोगों से भी बात करने पर ज्यादातर लोग मुकाबला कांग्रेस और जद(एस) के बीच बताते हैं। मंड्या की दूसरी सीटों पर भी कमोबेश कांग्रेस और जद(एस) के बीच ही मुकाबले की बात लोग करते हैं। 

भाजपा का जिक्र करने पर कई लोग यह भी कहते हैं कि चुनाव प्रदेश के लिए हो रहा है। जब देश के लिए होगा तब हम भाजपा और मोदी के बारे में सोचेंगे। एसएम कृष्णा का नाम लेने पर लोग कहते हैं कि भले ही कृष्णा मंड्या से हैं,लेकिन उन्होंने क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं किया इसलिए उनके होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
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