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ब्रिक्स के पहले दिन की तस्वीरें: मोदी-पुतिन-जिनपिंग ने लगाए ठहाके; एक बस में सवार हुए योगी-धामी और कई मंत्री

Sat, 12 Sep 2026 06:56 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन दिल्ली में कई ऐसे पल कैमरे में कैद हुए, जिन्होंने सबका ध्यान खींचा। पीएम मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग साथ नजर आए और हंसी-मजाक करते दिखे। परिवार की तस्वीर से लेकर संयुक्त पेड़ लगाने तक, नेताओं के बीच सहजता दिखाई दी। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा पीएम मोदी के अंदाज की रही। आखिर इन तस्वीरों के पीछे कितना बड़ा कूटनीतिक संदेश है? आइए तस्वीरों से समझते हैं...
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तस्वीर ने खास ध्यान खींचा है। तीनों नेता एक ही फ्रेम में नजर आए और एक दूसरे के साथ गर्मजोशी से दिखाई दिए। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स नेताओं के साथ परिवार की तस्वीर भी खिंचवाई। इस पूरे दृश्य में सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की रही, जब पीएम मोदी ने नेताओं को हाथ मिलाने के लिए इशारा किया और देखते ही देखते यह पल एकता और साथ का संदेश देने वाली तस्वीर बन गया। आइए, देखते हैं कौन सी तस्वीरों ने दुनिया में हलचल बढ़ा दी।
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एक फ्रेम में मोदी, पुतिन और जिनपिंग साथ आए तो क्या दिखा?

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ पुतिन और जिनपिंग की कई तस्वीरें सामने आईं। एक तस्वीर में तीनों नेता साथ खड़े नजर आए, जबकि दूसरी तस्वीर में पीएम मोदी, पुतिन, जिनपिंग और दूसरे ब्रिक्स नेताओं ने परिवार की तस्वीर के लिए साथ पोज दिया। इस दौरान नेताओं के बीच हंसी-मजाक और सहज माहौल भी दिखाई दिया। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से नेताओं को हाथ मिलाने का इशारा करने वाला पल खास बन गया। अलग-अलग देशों और अलग-अलग हितों वाले नेताओं का इस तरह एक साथ दिखाई देना ब्रिक्स के सामूहिक मंच की तस्वीर पेश करता है। यह तस्वीर ऐसे समय आई है, जब ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा है।

हाथ मिलाने के इशारे ने क्यों खींचा सबका ध्यान?

परिवार की तस्वीर के लिए नेताओं के एक साथ खड़े होने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नेताओं को हाथ मिलाने का इशारा किया। इसके बाद यह पल कैमरों में कैद हो गया। इस दृश्य में मोदी, पुतिन और जिनपिंग समेत ब्रिक्स के दूसरे नेताओं की मौजूदगी दिखाई दी। तस्वीर में एक तरफ नेताओं की एकजुटता नजर आई, तो दूसरी तरफ उनके बीच सहजता भी दिखाई दी। यही वजह है कि यह सामान्य समूह तस्वीर से आगे बढ़कर एक ऐसा दृश्य बन गई, जिसमें ब्रिक्स के भीतर सामूहिक शक्ति और एक साथ आगे बढ़ने का संदेश दिखाई देता है। भारत के लिए भी यह तस्वीर महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिखर सम्मेलन की मेजबानी दिल्ली में हो रही है और प्रधानमंत्री मोदी इसकी अगुवाई कर रहे हैं।
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क्या पेड़ लगाने का कार्यक्रम भी बना खास संदेश?

ब्रिक्स नेताओं ने भारत मंडपम में संयुक्त रूप से पेड़ लगाने के कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी के साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्रिक्स के दूसरे नेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए। पेड़ लगाने की यह पहल सम्मेलन के दौरान सहयोग और साझा जिम्मेदारी की भावना को सामने लाती है। इसके अलावा भारत मंडपम में ब्रिक्स से जुड़ी गतिविधियों और ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी में भी नेताओं की मौजूदगी रही। पीएम मोदी के साथ पुतिन और जिनपिंग की तस्वीरें इस दौरान भी सामने आईं। इससे सम्मेलन में नेताओं की भागीदारी और भारत की मेजबानी की तस्वीर और साफ हुई।



भारत के केंद्रीय मंत्री और कई मुख्यमंत्री रात्रिभोज में हुए शामिल

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में शामिल होने आए वैश्विक नेताओं के लिए कुछ ही देर में रात्रिभोज का आयोजन होगा। इस डिनर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत अन्य मंत्री भारत मंडपम के लिए रवाना हुए। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए विभिन्न राज्यों के केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री एक साथ भारत मंडपम के लिए रवाना हुए।

नई दिल्ली घोषणा में पश्चिम एशिया को लेकर क्या कहा गया?

परिवार की तस्वीर से पहले ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली घोषणा 2026 को अपनाया। इसमें पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई। घोषणा में कहा गया कि ऐसे कदमों से बचना चाहिए, जो स्थिति को और खराब कर सकते हैं। नागरिकों और नागरिक ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही गई। साथ ही बातचीत और कूटनीति के जरिए लंबे समय की समझ बनाने और क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई गई। वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा का प्रवाह अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक सुचारू बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

फलस्तीन और गाजा को लेकर ब्रिक्स का क्या रुख रहा?

नई दिल्ली घोषणा में गाजा पट्टी में युद्धविराम बनाए रखने और मानवीय मदद की पूरी और बिना रुकावट पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की गई। ब्रिक्स ने संबंधित संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने की जरूरत पर जोर दिया। घोषणा में मौजूदा वैश्विक माहौल में ध्रुवीकरण और अविश्वास का भी जिक्र किया गया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा मजबूत करने के लिए वैश्विक स्तर पर मिलकर काम करने की बात कही गई। इस तरह शिखर सम्मेलन में सिर्फ आर्थिक और विकास से जुड़े मुद्दे ही नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया और गाजा जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को लेकर क्या कहा गया?

ब्रिक्स की नई दिल्ली घोषणा में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया गया। इसमें कहा गया कि सुरक्षा परिषद में सुधार से ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज और मजबूत होनी चाहिए। चीन और रूस ने दोहराया कि वे संयुक्त राष्ट्र में ब्राजील और भारत की बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन करते हैं। दोनों देश सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं। ऐसे में घोषणा में भारत की भूमिका को लेकर यह समर्थन महत्वपूर्ण है। भारत लंबे समय से वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की बात करता रहा है और ब्रिक्स के मंच से भी इस मुद्दे को जगह मिली।


 

भारत की मेजबानी को लेकर क्या खास रहा?

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे भारत की भूमिका को भी नई दिल्ली घोषणा में सराहा गया। ब्रिक्स देशों ने 18वें शिखर सम्मेलन के आउटरीच और ब्रिक्स प्लस संवाद सत्र की मेजबानी के लिए भारत की सराहना की। इसमें कहा गया कि इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को मजबूत करने को नई गति मिली है। दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में अलग-अलग देशों के नेता एक मंच पर आए। पीएम मोदी की पुतिन और जिनपिंग के साथ तस्वीरें इसी व्यापक बैठक का अहम हिस्सा बनीं। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सम्मेलन की पूरी तस्वीर में वह मेजबान देश के रूप में केंद्र में दिखाई दे रहा है।

ब्रिक्स की तस्वीर में कितनी बड़ी दिखी सामूहिक ताकत?

ब्रिक्स के परिवार की तस्वीर में कई देशों के नेता एक साथ दिखाई दिए। इसमें ब्राजील, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, मिस्र, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और इथियोपिया के शीर्ष नेता शामिल रहे। एक ही तस्वीर में इतने अलग-अलग देशों के नेताओं का साथ आना ब्रिक्स के बढ़ते दायरे को दिखाता है। खास बात यह रही कि भारत, रूस और चीन के शीर्ष नेता एक साथ नजर आए। यही दृश्य इस पूरे सम्मेलन की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल हो गया। हाथ मिलाने का इशारा, नेताओं की मुस्कान और साथ खड़े होने का अंदाज इस तस्वीर को और ज्यादा प्रभावशाली बनाता है।
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क्या मोदी-पुतिन-जिनपिंग की तस्वीर ब्रिक्स की बदलती तस्वीर बताती है?

ब्रिक्स के इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी, पुतिन और जिनपिंग का एक साथ दिखाई देना अपने आप में महत्वपूर्ण दृश्य है। यह तस्वीर किसी नए समझौते की घोषणा नहीं करती, लेकिन ब्रिक्स के मंच पर तीनों प्रमुख देशों के नेताओं की मौजूदगी को जरूर सामने रखती है। इसके साथ नई दिल्ली घोषणा में वैश्विक शांति, पश्चिम एशिया, गाजा, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा, संयुक्त राष्ट्र सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज जैसे मुद्दों को जगह मिली है। ऐसे में हाथ मिलाते और मुस्कुराते नेताओं का यह दृश्य उस मंच की सामूहिक तस्वीर पेश करता है, जहां अलग-अलग देशों के बीच मतभेदों के बावजूद बातचीत और सहयोग की कोशिश दिखाई देती है।

दिल्ली से दुनिया को क्या संदेश गया?

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तस्वीरों में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका साफ तौर पर प्रमुख रही। पुतिन और जिनपिंग के साथ उनकी तस्वीर, सभी नेताओं की परिवार की तस्वीर और संयुक्त पेड़ लगाने का कार्यक्रम, इन सभी दृश्यों ने सम्मेलन की एक खास तस्वीर बनाई। एक तरफ नेता साथ खड़े होकर मुस्कुराते नजर आए, तो दूसरी तरफ नई दिल्ली घोषणा में दुनिया के गंभीर मुद्दों पर साझा रुख सामने आया। इसलिए मोदी-पुतिन-जिनपिंग की तस्वीर सिर्फ कैमरे के सामने खिंचा एक फ्रेम नहीं रह जाती। यह दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के उस माहौल को दिखाती है, जिसमें भारत ने अलग-अलग देशों को एक मंच पर साथ लाने की अपनी भूमिका निभाई।
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