ब्रिक्स के संस्थापक देश।
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अब जानें- अब तक कितने देश कर चुके ब्रिक्स के लिए आवेदन?
ब्रिक्स की पूर्ण सदस्यता के लिए अब तक 30 से ज्यादा देशों ने औपचारिक रूप से आवेदन किया है या इसमें शामिल होने की इच्छा जताई है। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया हालिया समय में इस गठबंध से जुड़ने वाले कुछ सदस्य हैं। वहीं, तुर्किये, अजरबैजान और पाकिस्तान जैसे कई देश ब्रिक्स के लिए आवेदन कर चुके हैं और सदस्यता पाने की कतार में हैं।
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3. मार्गदर्शक सिद्धांत और नियम
2023 के जोहानेसबर्ग शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स नेताओं ने सदस्यता विस्तार के लिए औपचारिक मार्गदर्शक सिद्धांत, मानक और मानदंड स्वीकार किए थे। इसके तहत ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले देशों का...
- सभी मौजूदा ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ सकारात्मक कूटनीतिक संबंध होना अनिवार्य है।
- बहुपक्षवाद (मल्टीलेटरलिज्म) और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की प्रतिबद्धता दिखाना जरूरी है।
- वैश्विक दक्षिण के विकास और बहुध्रुवीय व्यवस्था के सिद्धांतों का समर्थन करना भी जरूरी है।
4. औपचारिक आमंत्रण
जब सभी मौजूदा सदस्य देश सर्वसम्मति से किसी आवेदन को मंजूरी दे देते हैं, तो शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स नेताओं की ओर से उस देश को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने का आधिकारिक आमंत्रण दिया जाता है।
5. साझेदार देशों का अलग वर्ग भी
2024 के कजान शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स ने साझेदार देश (पार्टनर कंट्री) की एक नई श्रेणी शुरू की। इसके माध्यम से पूर्ण सदस्यता न पाने वाले देश भी ब्रिक्स की पहलों, सम्मेलनों और व्यापारिक व्यवस्थाओं से जुड़ सकते हैं।
ब्रिक्स में सदस्यता के चरण।
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ब्रिक्स में पाकिस्तान-तुर्किये की एंट्री क्यों नहीं?
पाकिस्तान की तरफ से ब्रिक्स में शामिल होने के लिए साल 2023 में औपचारिक रूप से आवेदन किया गया था। इसके बावजूद उसे अब तक ब्रिक्स की सदस्यता नहीं मिल सकी है। ब्रिक्स में किसी भी देश के शामिल करने की सबसे बड़ी ताकत संस्थापकों को ही दी गई है, जिसमें भारत भी शामिल है। इसे वीटो शक्ति कहा जाता है, जिसके तहत संस्थापक किसी भी देश की एंट्री पर रोक लगा सकते हैं।
- ब्रिक्स में नए सदस्यों के आने के लिए सभी संस्थापक और स्थायी सदस्यों की सहमति जरूरी है। तुर्किये-पाकिस्तान की स्थायी सदस्यता के आवेदन पर विचार न होने की एक यह बड़ी वजह है।
- ब्रिक्स का नियम, जिसमें आवेदन करने वाले देश का सभी सदस्यों से अच्छा कूटनीतिक रिश्ता होना जरूरी है, पाकिस्तान के लिए मुश्किल पैदा करता है। कूटनीतिक स्तर पर आतंकवाद की वजह से वह दुनियाभर में घिर चुका है।
- पाकिस्तान को सार्वजनिक तौर पर चीन का समर्थन हासिल है। बीते वर्षों में उसने रूस के साथ भी रिश्ते बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि, भारत के ब्रिक्स में सभी देशों के साथ गहरे रिश्ते हैं, जो पाकिस्तान पर भारी पड़ते हैं।
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ब्रिक्स के भारत में आयोजन का इतिहास।
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3. ब्रिक्स से जुड़कर ग्लोबल साउथ में मंच की तलाश
ब्रिक्स को वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख और उभरते हुए बहुपक्षीय विकल्प के रूप में देखा जाता है। ऐसे में ब्रिक्स की सदस्यता मिलने से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक चर्चाओं, समावेशी बहुपक्षवाद और कूटनीतिक वार्ताओं में एक मजबूत वैश्विक मंच मिल सकता है।