सूरत ट्रेडर्स एसोसिएशन के सदस्य जगदीश भाई ने अमर उजाला से कहा कि महेश सवानी पूरे गुजरात में एक निष्पक्ष और बेहद ईमानदार व्यक्ति के तौर पर देखे जाते हैं। समाज में उनकी बहुत अधिक प्रतिष्ठा है। उनके आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ने से उसको मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी।
पिछले चुनाव में भाजपा की अटकी थी सांस
सूरत अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विशेष समर्थक गढ़ के रूप में देखा जाता रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जब सत्ता तक पहुंचने को लेकर भाजपा की सांस अटक गई थी, इसी सूरत ने प्रधानमंत्री की 'गुजरात के बेटे' की छवि को बचा लिया था क्योंकि इस गढ़ में भाजपा ने बेहद अच्छा प्रदर्शन किया था। ऐसे समर्थक गढ़ का कांग्रेस के मुकाबले आम आदमी पार्टी की तरफ झुक जाना दोनों पार्टियों के लिए बड़ा झटका है।
दरअसल, सूरत प्रमुख रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के श्रमिकों का गढ़ माना जाता है। वे यहां की टेक्सटाइल कंपनियों में श्रम करते हैं और गुजरात के विकास में योगदान देते हैं।
सूरत नगर निगम में आम आदमी पार्टी की जीत को यूपी और बिहार के लोगों के बीच दिल्ली सरकार के विकास के मॉडल को मिल रही स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। यही कारण है कि पार्टी न केवल गुजरात, बल्कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी अपने लिए एक संभावना देख रही है।
महेश सवानी को अपने पाले में कर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल बहुत खुश हैं। सवानी के पार्टी से जुड़ने के बाद उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उनका पार्टी में स्वागत है। यह दिल्ली सरकार की आम आदमी के प्रति प्रतिबद्धता की जीत है और अब वे सब मिलकर गुजरात का विकास करेंगे।
वहीं, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि महेश सवानी का पार्टी के साथ जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि दिल्ली सरकार का आम आदमी के प्रति जो प्रतिबद्धता है, उसे जनता के बीच सहर्ष स्वीकार किया जा रहा है और जनता इसे एक बदलाव के रूप में देख रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी गुजरात को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।