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गवाहों को मारने के लिए आसाराम के चेलों ने किया था शूटर का ब्रेनवॉश

Wed, 16 Mar 2016 05:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

  • गवाहों को मारने वाला शूटर जेल में आसाराम से भी मिला था।
  • आसाराम के साथियों ने ही शूटर को गवाहों की हत्या के लिए उकसाया।
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आसाराम (फाइल फोटो)
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विस्तार
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आसाराम बापू के गवाहों को रास्ते से हटाने के लिए शूटर कार्तिक का ब्रेनवॉश किया गया था। वह जेल में आसाराम से भी मिला था। उनके साथियों ने ही उसे गवाहों की हत्या के लिए उकसाया। कार्तिक को बताया था कि मुसीबत में बापू की मदद करोगे तो स्वर्ग में जगह मिलेगी। कार्तिक को बापू के साधक ही खर्च और हथियार मुहैय्या कराते थे।
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सूरत की दो बहनों के यौन शोषण के आरोप में जोधपुर जेल में बंद आसाराम के रसोइए अखिल गुप्ता की शहर में 11 जनवरी 2015 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। केस के खुलासे के लिए प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर रखी है। फिलहाल सभी पत्रावलियां सीबीआई के लखनऊ दफ्तर में हैं।

सोमवार को रायपुर से एटीएस के हत्थे चढ़े शूटर कार्तिक हलदर ने अखिल गुप्ता समेत आसाराम के तीनों गवाहों की हत्या कबूल की है। पूछताछ में नए-नए राज खुल रहे हैं। मुजफ्फरनगर पुलिस की ओर से सब इंस्पेक्टर हिंदवीर सिंह के नेतृत्व में एक टीम आरोपी से पूछताछ के लिए अहमदाबाद रवाना हो गई है।
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अहमदाबाद में मामले की जांच कर रहे क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सीबी चौधरी के मुताबिक कार्तिक ने पूछताछ में कई राज उगले हैं। वह आसाराम से भी जेल में कई बार मिल चुका है। आसाराम के चेलों ने कार्तिक को समझाया कि बापू का साथ देने पर जीवन के सारे संकट दूर हो जाएंगे।

सूरत के एक आश्रम में तैयार किया गया प्लान

आसाराम (फाइल फोटो)
आसाराम की भक्ति में कार्तिक तीन-तीन कत्ल करने के लिए तैयार हो गया। सूरत के एक आश्रम में प्लान तैयार किया गया और बापू को बचाने की कसमें खाई गईं। पूरे मामले को लीड करने की जिम्मेदारी सूरत आश्रम के ही सेवक प्रवीण को सौंपी गई।

जिस गवाह को मारना होता था, उसकी पहले बकायदा रेकी की जाती थी। बाद में कार्तिक को सारी योजना समझाकर उस शहर में भेजा जाता था। उसके आने-जाने का किराया, ठहरने आदि की व्यवस्था, घटना में इस्तेमाल किया जाने वाला वाहन, हथियार और फरारी के दौरान का सारे खर्चे की व्यवस्था प्रवीण ही करता था।

मुजफ्फरनगर में भी वारदात से कई दिन पहले वह यहां पहुंच गया था और वारदात को अंजाम देने के बाद ही उसने शहर छोड़ दिया। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वारदात में कार्तिक के साथ कौन था और शहर के किस होटल अथवा रेस्तरां का इस्तेमाल किया गया। 
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कार्तिक के कई वार गए खाली

- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
अखिल गुप्ता की हत्या में पकड़े गए कार्तिक के बारे में एटीएस की ओर से बताया गया कि इसी ने अखिल गुप्ता के अलावा 23 मई 2014 को राजकोट के एक क्लिनिक पर अमृत प्रजापति को गोली मारी थी, जिसकी बाद में 11 जून को अहमदाबाद के हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। जोधपुर में कानपुर निवासी राहुल सचान और पानीपत में महेंद्र चावला पर भी हमला इसी ने किया था।

हम गिरफ्तारी से संतुष्ट नहीं: नरेश 

अखिल गुप्ता की हत्या के मामले में रायपुर से कार्तिक की गिरफ्तारी को लेकर अखिल के पिता नरेश गुप्ता संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक सीबीआई अपनी रिपोर्ट पेश नहीं करती है, तब तक उनका किसी भी गिरफ्तारी पर विश्वास नहीं है। केस के सभी तथ्य और पत्रावलियां उन्होंने सीबीआई को सौंप दिए हैं। जांच के बाद सच सामने आएगा। बताते चलें कि अखिल की पत्नी वर्षा और उनके ससुर की सुरक्षा में घर के बाहर पिकेट तैनात है।
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