महाराष्ट्र के ठाणे जिले में बुलेट ट्रेन परियोजना के खोदे गए गड्ढे में डूबने से एक बच्चे की मौत हो गई। मामले में स्थानीय सांसद ने कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं इस मामले में ठेकेदार पर एक केस भी दर्ज किया गया है। 508 किलोमीटर लंबी हाई स्पीड रेल लाइन मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ेगी। परियोजना के हिस्से के रूप में, मुंबई से 60 किलोमीटर दूर भिवंडी में एक डिपो बनाया जा रहा है।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी कस्बे में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए खोदे गए गड्ढे में 12 वर्षीय एक लड़के के डूब जाने के बाद एक ठेकेदार के खिलाफ कथित लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है। मामले में स्थानीय एनसीपी सांसद सुरेश म्हात्रे ने दावा किया कि खुदाई स्थल के आसपास कोई बैरिकेड नहीं थे, जबकि परियोजना को क्रियान्वित करने वाली नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने कहा कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए थे।
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पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ दर्ज किया केस
वहीं नारपोली पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक भरत कामत ने बताया कि यह घटना सोमवार शाम कोपर गांव में हुई, जब लड़का पानी से भरे असुरक्षित खुदाई स्थल में गिर गया। उन्होंने बताया कि ठेकेदार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (लापरवाही से मौत) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
हादसे पर एनएचएसआरसीएल ने जारी किया बयान
गुरुवार को जारी एक बयान में, एनएचएसआरसीएल ने कहा कि लड़का कथित तौर पर खंभों के निर्माण के लिए खुदाई स्थल पर तैरने गया था, और वहां पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए थे। निगम ने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं और एनएचएसआरसीएल तथा इसके ठेकेदार जांच में पूरा सहयोग करेंगे। निगम ने आगे कहा, हम निर्माण स्थलों के आसपास रहने वाले लोगों से आग्रह करते हैं कि वे बिना अनुमति के बैरिकेड वाले क्षेत्रों में प्रवेश न करें।
स्थानीय सांसद ने मृतक के परिजनों की मुलाकात
बुधवार को भिवंडी के सांसद और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता सुरेश म्हात्रे ने बच्चे के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया, यह हृदय विदारक घटना परियोजना में शामिल कंपनी की गैरजिम्मेदारी का सीधा परिणाम है। घटना के समय खुदाई स्थल पर कोई सुरक्षा बैरिकेड या चेतावनी संकेत नहीं थे, जिसके कारण बच्चे की मौत हो गई। त्रासदी के बाद ही जल्दबाजी में बैरिकेड लगाए गए, जिससे कंपनी की लापरवाही और नुकसान को नियंत्रित करने में लापरवाही दोनों उजागर हुई। सांसद ने कहा, जब तक न्याय नहीं हो जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे। कंपनियों को विकास के नाम पर मासूमों की जान से नहीं खेलना चाहिए।