मुंबई विश्वविद्यालय (एमयू) ने 17 अगस्त को चुनावों पर अनिश्चित काल के लिए रोक लगा दी थी, वहीं अब बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें एमयू के फैसले को चुनौती दी गई है।
मुंबई विश्वविद्यालय (एमयू) ने 17 अगस्त को चुनावों पर अनिश्चित काल के लिए रोक लगा दी थी, वहीं अब बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें एमयू के फैसले को चुनौती दी गई है और बताया गया है चुनावों के निलंबन का फैसला राजनीतिक दबाव के कारण लिया गया। याचिका का उल्लेख मंगलवार को न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति फिरदोश पूनीवाला की पीठ के समक्ष किया गया।
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अधिवक्ता सागर देवरे द्वारा दायर याचिका में मांग की गई है कि सीनेट चुनावों पर रोक लगाने वाले एमयू द्वारा जारी परिपत्र को रद्द किया जाए और विश्वविद्यालय को दस सितंबर को निर्धारित चुनाव कार्यक्रम शुरू करने और पूरा करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया जाए। पीठ इस पर बुधवार को सुनवाई करने पर सहमत हो गई है।
याचिका में कहा गया है कि कुलपति (वीसी), चांसलर और रजिस्ट्रार ने नौ अगस्त को एक चुनाव अधिसूचना जारी की और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की 10 सीटों के लिए मुंबई विश्वविद्यालय के सीनेट चुनाव की घोषणा की। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त थी। अचानक, राजनीतिक दबाव के कारण, एमयू ने 17 अगस्त को एक परिपत्र जारी कर अनिश्चित काल के लिए सीनेट चुनाव पर रोक लगा दी, जो दस सितंबर को निर्धारित था।
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याचिका के अनुसार, पिछला सीनेट चुनाव 26 मार्च, 2018 को हुआ था और सीनेट का कार्यकाल 30 सितंबर, 2022 तक होगा। एमयू ने जून 2022 में सीनेट चुनाव की प्रक्रिया शुरू की थी। अंतिम मतदाता सूची 27 जुलाई 2023 को प्रकाशित की गई थी।
नौ अगस्त को, डुप्लिकेट मतदाताओं में सुधार के बाद 94,613 मतदाताओं वाली एक संशोधित अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। उसी दिन भाजपा विधायक आशीष शेलार ने मतदाता सूची पर आपत्ति जताई और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा। 17 अगस्त को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के उप सचिव ने एमयू को शेलार की आपत्तियों की जांच करने का निर्देश दिया। एमयू ने तर्क दिया कि जांच एक दिन में नहीं की जा सकती और इसलिए सीनेट चुनाव पर रोक लगाने की अधिसूचना जारी की गई।