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Bombay High Court: 'पुलिस एस्कॉर्ट शुल्क पर सौदेबाजी नहीं चलेगी'; अबू सलेम की पैरोल याचिका पर हाईकोर्ट सख्त

Tue, 03 Feb 2026 09:14 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1993 मुंबई धमाकों के दोषी अबू सलेम से कहा कि पैरोल के लिए पुलिस एस्कॉर्ट शुल्क पर मोलभाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने 17 लाख रुपये से अधिक की राशि न देने पर पैरोल याचिका खारिज करने के संकेत दिए।
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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1993 मुंबई सिलसिलेवार धमाकों के मामले में सजा काट रहे अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पैरोल पर जाने के लिए पुलिस एस्कॉर्ट शुल्क को लेकर कोई सौदेबाजी नहीं की जा सकती। अदालत ने संकेत दिए कि यदि निर्धारित राशि जमा नहीं की गई तो उसकी पैरोल याचिका खारिज की जा सकती है।

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न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चंदक की खंडपीठ अबू सलेम की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने अपने बड़े भाई अबू हकीम अंसारी के निधन पर उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ स्थित पैतृक गांव जाने के लिए पैरोल मांगी थी।

17 लाख से ज्यादा का एस्कॉर्ट खर्च
सलेम इस समय नासिक रोड सेंट्रल जेल में बंद है। जेल प्रशासन ने अदालत को बताया कि अगर सलेम को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ पैरोल दी जाती है, तो उसे 17 लाख रुपये से अधिक की राशि एस्कॉर्ट टीम के खर्च के तौर पर जमा करनी होगी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सलेम की वकील फरहाना शाह ने अदालत को बताया कि यह राशि बेहद ज्यादा है और उनका मुवक्किल वर्षों से जेल में बंद होने के कारण आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हालत में है। उन्होंने कहा कि सलेम एक लाख रुपये से अधिक भुगतान करने की स्थिति में नहीं है।
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कोर्ट की दो टूक
इस पर हाईकोर्ट ने साफ कहा आप एस्कॉर्ट शुल्क पर मोलभाव नहीं कर सकते। अगर पैरोल चाहिए, तो तय शुल्क देना होगा। अदालत ने वकील से कहा कि या तो याचिका वापस ले ली जाए या फिर अदालत इसे खारिज कर देगी। इसके बाद सलेम की ओर से समय मांगे जाने पर मामले की सुनवाई गुरुवार तक के लिए टाल दी गई।

पहले भी खारिज हो चुकी है मांग
अबू सलेम ने दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उसने बताया था कि भाई की मौत नवंबर में हुई थी, लेकिन क्रिसमस अवकाश के कारण याचिका दाखिल करने में देरी हुई। सलेम के अनुसार, उसने 15 नवंबर को 14 दिन की आपात पैरोल के लिए जेल प्रशासन को आवेदन दिया था, ताकि अंतिम संस्कार और अन्य रस्मों में शामिल हो सके। हालांकि, जेल अधिकारियों ने 20 नवंबर 2025 को उसका आवेदन खारिज कर दिया था।

अब तक सीमित पैरोल
अपनी याचिका में सलेम ने यह भी कहा कि नवंबर 2005 में गिरफ्तारी के बाद से उसे केवल कुछ ही बार, वह भी मां और सौतेली मां के निधन पर, सीमित अवधि की पैरोल दी गई है। गौरतलब है कि अबू सलेम को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर 11 नवंबर 2005 को भारत लाया गया था। वह 1993 मुंबई धमाकों के मामले में 25 साल की सजा काट रहा है। इसके अलावा, 1995 में मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में एक विशेष TADA अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई है।
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