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Right To Bodily Autonomy: 26 हफ्ते का गर्भ गिरा सकेगी महिला; बच्चे को जन्म देने के अधिकार पर अदालत का फैसला

Mon, 31 Mar 2025 03:37 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महिलाओं को प्रजनन की स्वतंत्रता, शारीरिक स्वायत्तता और पसंद के अधिकार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि 32 वर्षीय महिला 26 हफ्ते का गर्भ गिरा सकेगी। महिला ने गर्भ में पल रहे भ्रूण में विसंगतियों (anomalies) के आधार पर गर्भ को गिराने की अनुमति मांगी थी। इस पर कोर्ट ने अपने फैसले में बच्चे को जन्म देने के अधिकार पर अहम टिप्पणी की।
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बच्चे को जन्म देने के अधिकार पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : फ्रीपिक / एएनआई
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विस्तार
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एक 32 वर्षीय गर्भवती की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम आदेश पारित किया है। इस फैसले में कोर्ट ने बच्चे को जन्म देने के अधिकार पर अहम टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति रेवती मोहित डेरे और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने महिला को अपनी पसंद के निजी अस्पताल में गर्भपात की अनुमति दी है। हालांकि, अस्पताल को एक हलफनामा दाखिल कर अदालत को बताना होगा कि हॉस्पिटल में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम के तहत सभी जरूरतें पूरी करने का इंतजाम है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में महिलाओं को प्रजनन की स्वतंत्रता, शारीरिक स्वायत्तता और पसंद के अधिकार पर विशेष जोर दिया है।

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भ्रूण की विसंगतियों के कारण गर्भपात करा सकती है महिला

दो जजों की खंडपीठ के समक्ष जिस याचिका पर सुनवाई हुई, उसमें महिला ने भ्रूण की विसंगतियों के कारण गर्भपात की अनुमति मांगी थी। तथ्यों पर विचार के बाद कोर्ट ने 28 मार्च को पारित आदेश में कहा, याचिकाकर्ता के प्रजनन स्वतंत्रता के अधिकार, शरीर पर उसकी स्वायत्तता और उसकी पसंद के अधिकार को ध्यान में रखते हुए गर्भपात की अनुमति दी जा रही है। कोर्ट ने याचिकारक्ता की शारीरिक स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि महिला चिकित्सकीय रूप से गर्भ गिरा सकती है। 
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24 हफ्ते से अधिक का गर्भ गिराने पर कानूनी प्रावधान
महिला ने अपनी याचिका में यह सुनिश्चित करने की मांग की थी कि गर्भपात की प्रक्रिया में भ्रूण की हृदय गति को कम किया जाए, जिससे बच्चा जीवित पैदा न हो। इस पर कोर्ट ने सरकारी अस्पताल- जेजे हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड को गर्भपात के सबसे उपयुक्त तरीके पर राय देने का निर्देश भी दिया। बता दें कि एमटीपी एक्ट के प्रावधानों में निजी अस्पतालों में 24 हफ्ते से अधिक समय का गर्भ अदालत की अनुमति के बिना नहीं गिराया जा सकता।

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जेजे अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने भ्रूण की सेहत का आकलन किया

मुंबई में रहने वाली इस महिला की पैरवी करने वाले वकील मीनाज काकलिया ने कहा, गर्भधारण के लगभग 24वें हफ्ते में इको कार्डियोग्राफी कराने के बाद भ्रूण में विसंगति का पता चला। डॉक्टरों ने महिला को बताया कि गर्भ में पल रहा भ्रूण कंकाल संबंधी डिसप्लेसिया पीड़ित है। ऐसी स्थिति में गंभीर बीमारियों का खतरा होता है। महिला की सेहत और मेडिकल रिकॉर्ड्स के आधार पर जेजे अस्पताल के एक मेडिकल बोर्ड ने भ्रूण की स्थिति का आकलन करने के बाद गर्भपात के लिए हरी झंडी दे दी थी।

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