बॉम्बे हाईकोर्ट ने मानवाधिकार आयोग द्वारा महालक्ष्मी रेसकोर्स लीज मामले पर सुनवाई करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि प्रथम दृष्टया वह ये नहीं समझ पा रहे हैं कि ऐसे मामले पर महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कैसे कर सकता है! बता दें कि महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग महालक्ष्मी रेसकोर्स की लीज का नवीनीकरण करने मामले की सुनवाई कर रहा था।
बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस नीला गोखले की डिवीजन बेंच ने बीती आठ मार्च को महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग के मुख्य सचिव की याचिका पर यह आदेश दिया। बता दें कि महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने बीती 17 फरवरी को अपने एक आदेश में मुख्य सचिव, बीएमसी कमिश्नर, शहरी विकास विभाग के सचिव और अन्य अधिकारियों पर महालक्ष्मी रेसकोर्स की लीज को नवीनीकरण करने में नाकाम रहने और इसका जायज कारण नहीं बता पाने पर अधिकारियों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।
मानवाधिकार आयोग के इस आदेश के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट का रुख किया। जहां हाईकोर्ट ने मानवाधिकार आयोग के इस मामले पर सुनवाई करने से ही रोक लगा दी। बता दें कि रॉयल वेस्टर्न इंडिया टर्फ क्लब को मई 1994 में 220 एकड़ में फैला महालक्ष्मी रेसकॉर्स लीज पर दिया गया था। हालांकि यह लीज साल 2013 में ही खत्म हो चुकी है लेकिन अभी तक इसका नवीनीकरण नहीं किया गया है। दिसंबर 2022 में महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिकारियों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था।
जब 17 फरवरी के आदेश में भी मानवाधिकार आयोग अपने आदेश पर कायम रहा तो राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया। जहां से राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि एक कॉन्ट्रैक्ट के मामले पर, जो सरकार और बीएमसी के बीच का मामला है, वहां मानवाधिकार आयोग सुनवाई कैसे कर सकता है। यह उसके न्याय क्षेत्र में नहीं आता है। हाईकोर्ट अब इस मामले पर 15 मार्च को सुनवाई करेगा।