बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मानसिक रूप से बीमार हत्या के दोषी को बड़ी राहत दी है। आरोपी को उम्रकैद की सजा दी गई थी। शख्स को इसलिए जेल भेज दिया गया था क्योंकि उसने अपनी दोषसिद्धी को चुनौती नहीं दी थी। अदालत ने उसकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उसकी सजा को कम कर दिया। जितना समय वह जेल में बिता चुका है उसे ही सजा मानते हुए अदालत ने उसकी रिहाई के आदेश दे दिए।
न्यायाधीश बीपी धर्माधिकारी और प्रकाश देव नाइक की पीठ ने हत्या के दोषी सागर पवार की सजा को धारा 304 के तहत कम कर दिया। पीठ ने कहा, 'रिकॉर्ड में मौजूद सबूत दिखाते हैं कि कृत्य इस जानकारी के साथ किया गया था कि उससे मौत हो सकती थी लेकिन मारने का कोई इरादा नहीं था या शरीर पर ऐसी चोट करनी थी जिससे कि मौत हो जाए।'
पवार को साल 2011 में गिरफ्तार किया गया था और उसे दो अन्य के साथ 2014 में हत्या का दोषी पाया गया था। दोनों आरोपियों ने उच्च न्यायालय में अपील की थी जिससे उनकी सजा चार साल तक कम हो गई। 2015 में अदालत को जेल अधिकारियों ने बताया कि पवार मानसिक बीमारी से पीड़ित है और उसका उसी जेल में इलाज चल रहा है।
पीठ ने कहा, 'इस तथ्य पर ध्यान देते हुए कि आरोपी की मानसिक स्थिति अपील दायर करने के लिए ठीक नहीं है। जेल अधिकारियों को यह निर्देश दिए जाते हैं कि उसका ठीक तरह से चिकित्सा उपचार किया जाना चाहिए और जब भी उसकी मानसिक स्थिति ठीक हो उसे अपील करने के लिए सूचित किया जाए।'
पवार ने आखिरकार 2017 में उच्च न्यायालय में अपील दायर की। पीठ ने सबूतों को देखते हुए कहा, 'घटना को बिना सोचे-समझे अंजाम दिया गया। पीड़ित को लात और मुट्ठी से मारा गया। मौखिक और चिकित्सीय साक्ष्य को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि हत्या करने का कोई इरादा था।'