मराठा आरक्षण को लेकर जारी खुदकुशी पर चिंता व्यक्त करते हुए बांबे हाईकोर्ट ने कहा कि मराठा समुदाय के लोग धैर्य रखें। न तो हिंसक गतिविधियों में शामिल हों और न ही आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाएं। क्योंकि, मामला अभी अदालत में न्यायालय में विचाराधीन है। वहीं, राज्य सरकार से आरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों की प्रगति रिपोर्ट 10 सितंबर तक पेश करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति अनूजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ ने कहा कि मराठा आरक्षण को लेकर शुरू आंदोलन की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य पिछड़ा आयोग जल्द से मराठा आरक्षण से जड़ी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपे। सरकार का इस रिपोर्ट पर निर्णय लेना वैधानिक दायित्व है। हम आयोग से आशा व अपेक्षा रखते है कि वह अपना काम दो महीने में पूरा कर लेगा।
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इससे पहले राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रवि कदम ने खंडपीठ को बताया कि मराठा समुदाय से जुड़ी जानकारी के संकलन के लिए पांच एजेंसियां नियुक्त की गई हैं। इसके साथ ही विशेषज्ञों का एक पैनल भी बनाया गया है।
कदम ने कोर्ट को बताया कि विशेषज्ञ पैनल व पांच एजेंसियों द्वारा संकलित की गई जानकारी पांच सितंबर तक आयोग को दी जाएगी। इसके बाद आयोग इस जानकारी का विश्लेषण करेगा। आयोग ने सरकार को अपनी रिपोर्ट देने के लिए पांच सितंबर के बाद तीन महीने का समय मांगा है।
सरकार इस मामले में वक्त नहीं ले रही है आयोग ने समय मांगा है। आयोग एक वैधानिक संस्था है लिहाजा सरकार उसके काम में दखल नहीं दे सकती है। जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट नहीं देता तब तक सरकार निर्णय नहीं ले सकती। इस पर खंडपीठ ने कहा कि आयोग जल्द से जल्द अपना काम दो महीने में पूरा करने की कोशिश करें।