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पुणे जमीन घोटाला: पार्थ पवार को आरोपी क्यों नहीं बनाया? हाईकोर्ट ने डीजीपी से पूछा सवाल; जानिए पूरा मामला

Thu, 10 Sep 2026 12:05 AM IST
निर्मल कांत आईएएनएस, मुंबई।

सार

पुणे की सरकारी जमीन के कथित घोटाले में पार्थ पवार का नाम आरोपी के तौर पर नहीं है। कंपनी से जुड़े होने के बावजूद पुलिस ने सिर्फ एक शख्स को आरोपी बनाया। अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के डीजीपी से इस पर जवाब मांगा है। पढ़िए रिपोर्ट
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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से कड़े सवाल पूछे हैं। मामला पुणे में सरकारी जमीन की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। कोर्ट ने पूछा कि महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को इस मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। पार्थ पवार का नाम उस कंपनी से जुड़ा है, जिसने यह जमीन खरीदी थी।
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जमीन कितनी थी?
सुनवाई के दौरान जस्टिस माधव जामदार ने मामले पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि अमाडिया एंटप्राइजेज एलएलपी ने पुणे के मुंढवा इलाके में 40 एकड़ सरकारी जमीन खरीदी थी। यह जमीन बाजार की कीमत से काफी कम दाम में खरीदी गई थी।

कंपनी में कौन था?
जांच के दस्तावेज में कंपनी के दो निदेशक बताए गए हैं। इनमें पार्थ पवार और दिग्विजय पाटिल शामिल थे। लेकिन राज्य पुलिस ने सिर्फ दिग्विजय पाटिल को आरोपी बनाया। पार्थ पवार का नाम आरोपियों की सूची में नहीं रखा गया।
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पार्थ पवार को क्यों छोड़ा?
सितंबर में जारी अपने आदेश में जस्टिस जामदार ने इस आरोप का जिक्र किया। आरोप है कि पार्थ पवार को उनके खिलाफ कार्रवाई से बचाया गया। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि वह उपमुख्यमंत्री के बेटे हैं और उनका काफी प्रभाव है।

हाईकोर्ट ने डीजीपी से क्या कहा?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस से पूछा कि पार्थ पवार को उनके सहयोगी के साथ आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। कोर्ट ने महाराष्ट्र के डीजीपी सदानंद वसंत दाते को खुद हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। उन्हें जांच में इस अंतर की वजह बतानी होगी।

मामला सामने कैसे आया?
यह मामला पुणे के तहसीलदार सूर्यकांत येवले की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। येवले पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। आरोप है कि उन्होंने जमीन के इस फर्जी लेनदेन को कराने में मदद की। येवले ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जमीन के सौदे में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

अगली सुनवाई कब होगी?
हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के डीजीपी और जांच अधिकारी दोनों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। उन्हें अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

मुंढवा जमीन घोटाला क्या है?
मुंढवा जमीन घोटाला पुणे की सरकारी जमीन की कथित धोखाधड़ी वाली बिक्री और गैरकानूनी ट्रांसफर से जुड़ा है। यह जमीन मुंढवा में है। इसका कुल क्षेत्रफल 43.3 एकड़ है। यानी करीब 17.5 हेक्टेयर। इस जमीन की कीमत करीब 1,800 करोड़ रुपये आंकी गई है।

जमीन कितने में बेची गई?
पुणे की कारोबारी और बिल्डर शीतल तेजवानी के पास करीब 20 साल से मूल जमीन मालिकों की ओर से जमीन से जुड़े काम करने का अधिकार था। आरोप है कि शीतल तेजवानी ने इसी अधिकार का इस्तेमाल कर जमीन की बिक्री का दस्तावेज तैयार किया। इसके जरिये जमीन अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेच दी गई। इसके लिए सिर्फ 300 करोड़ रुपये की रकम तय की गई थी।

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सरकारी समिति ने क्या कहा?
सरकार की सात सदस्यों वाली एक समिति ने मामले की जांच की। इस समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खरगे ने की। समिति ने 4,392 पन्नों की जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी। समिति ने जमीन के इस सौदे को 'गैरकानूनी और आपराधिक' बताया।
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समिति ने किन लोगों को जिम्मेदार माना?
समिति ने साझेदार दिग्विजय पाटिल को जिम्मेदार ठहराया। अधिकार रखने वाली शीतल तेजवानी को भी जिम्मेदार बताया गया। इसके अलावा कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। समिति ने अपनी तत्काल जांच में पार्थ पवार को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया। लेकिन उसने अमाडिया एंटरप्राइजेज के वित्तीय दस्तावेज और लेनदेन के तरीके की पूरी पुलिस जांच की सिफारिश की।
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