बृहनमुबंई नगर निगम (बीएमसी) के हाइड्रॉलिक इंजीनियर अशोक तावडिया का कहना है कि मुंबईकर अब सीधे अपने नल से पानी पी सकते हैं। बीएमसी के अनुसार अप्रैल 2018 और मार्च 2019 के बीच मुंबई में रोजाना औसतन 0.7% पानी के नमूने एकत्रित किए गए, जिसमे कोलिफॉर्म बैक्टीरिया सकारात्मक पाया गया है।
यह माइक्रोऑर्गेनिज्म का एक समूह है जो पानी में मौजूद होता है तो उस पानी को पीने के लिए ठीक नहीं माना जाता है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के 5 फीसदी मानदंड से बेहतर है। तावडिया ने कहा कि रिहायशी कालोनियों को स्वच्छता सुनिश्चित करनी चाहिए। रिहायशी सोसाइटियों में भूमिगत और ओवरहेड वॉटर स्टोरेज टैंक और मलिन बस्तियों में ड्रम या बैरल को स्वच्छ रखना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'हमारा पानी पीने योग्य है और अगर निवासी यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनके टैंक नियमित रूप से साफ किए जाएं तो वह सीधे नल से पानी पी सकते हैं।' स्वच्छ पेयजल जीवन संकेतकों की गुणवत्ता में उच्च स्थान पर आता है। मुंबई में हर साल लगभग डिस्पेंसरियों और अस्पतालों में डायरिया के लाखों मामले सामने आते हैं।
ऐसा पानी मुहैया करवाना जिसे कि सीधे नल से पिया जा सके, यह एक उपलब्धि है। अतीत में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने कहा था कि भांडूप के बीएमसी के मास्टर बैलेंस रिसरवायर में उपलब्ध पानी दुनिया के सबसे शुद्ध पानी में से एक है लेकिन खराब वितरण प्रणाली के कारण नागरिकों तक जब यह पानी पहुंचता है तो इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है।
हालांकि दिसंबर 2018 से शहर के 7,000 किलोमीटर के जल वितरण प्रणाली में शुद्ध पानी बह रहा है। तावडिया ने कहा, 'दिसंबर से अनफिट नमूने (कोलीफॉर्म और ई कोली वाले) की संख्या एक प्रतिशत से कम है। मार्च में अनफिट नमूनों की संख्या घटकर 0.7 प्रतिशत हो गई।' अतंरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार 5 फीसदी से कम पानी के नमूनों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया हो सकता है।