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माकपा कार्यकर्ताओं ने बीएलओ को धमकाया- जोसेफ
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा कि जॉर्ज की तरफ से टेलीफोन पर की गई बातचीत से पता चला कि गणना के दौरान कांग्रेस के बूथ-स्तरीय एजेंटों के साथ जाने पर माकपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें धमकी दी थी। जोसेफ ने कहा, 'बातचीत से पता चला कि माकपा ने जॉर्ज के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराने की धमकी दी थी, जिसमें उन पर घरों में कांग्रेस के पर्चे बांटने का आरोप लगाया गया था। काम के तनाव के अलावा, इस राजनीतिक धमकी के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली।'
प्रदर्शनकारी बीएलओ का पूरा समर्थन- सनी जोसेफ
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रदर्शनकारी बीएलओ का पूरा समर्थन करती है। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि बीएलओ का विरोध चुनाव आयोग की आंखें खोलने पर मजबूर करेगा। हमारे बार-बार अनुरोध के बावजूद, आयोग ने ऐसे समय में एसआईआर कराने का फैसला किया जब स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणा हो चुकी है।' जोसेफ ने कहा कि पार्टी एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने आरोप लगाया, '2002 की मतदाता सूची को देखते हुए, मेरे पास भी मतदान का अधिकार नहीं है। कई राजनीतिक नेताओं के नाम मतदाता सूची में नहीं होंगे। भारत सरकार और चुनाव आयोग नागरिकों के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म कर रहे हैं।'
SIR का बहिष्कार करेंगे तमिलनाडु राजस्व कर्मचारी
तमिलनाडु के राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने सोमवार को घोषणा की कि वे 18 नवंबर से शुरू होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का बहिष्कार करेंगे। कर्मचारी संघों का कहना है कि उन पर बहुत अधिक काम का बोझ डाला जा रहा है, जबकि उपलब्ध जनशक्ति, प्रशिक्षण और संसाधन बेहद कम हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि अधिकारियों की तरफ से देर रात तक समीक्षा बैठकें करना और दिन में तीन-तीन वीडियो कॉन्फ्रेंस लेना काम को और अधिक कठिन बना देता है। एसआईआर के दौरान कर्मचारियों को मतदाता सूची से संबंधित फॉर्म बांटने, भरवाने और ऑनलाइन अपलोड करने जैसे काम करने पड़ते हैं, जिसे वे बिना पर्याप्त तैयारी के थोपे गए दबाव के रूप में देख रहे हैं।
संघों ने मांग की है कि सभी कर्मचारियों को ठीक से प्रशिक्षित किया जाए और ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में काम करने के लिए अतिरिक्त कर्मियों की नियुक्ति की जाए। इस विरोध में राजस्व विभाग के साथ-साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मिड-डे मील कर्मचारी, नगर निगम और पंचायत कर्मी भी शामिल होंगे। संघ का कहना है कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता, तब तक यह विरोध जारी रहेगा।