आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक की अपील पर सूचना आयुक्त बिमल जुल्का ने एसआईटी को आरटीआई एक्ट के दायरे में लाते हुए कहा कि सरकार का हर कदम लोक हित में होना चाहिए।
कालेधन पर गठित एसआईटी (विशेष जांच दल) आरटीआई एक्ट (सूचना अधिकार कानून) के तहत जवाबदेह है। इस बारे में केंद्रीय सूचना आयोग ने व्यवस्था दी है। आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक की अपील पर सूचना आयुक्त बिमल जुल्का ने एसआईटी को आरटीआई एक्ट के दायरे में लाते हुए कहा कि सरकार का हर कदम लोक हित में होना चाहिए।
दरअसल, वेंकटेश नायक ने वित्त मंत्रालय से सात बिंदुओं पर आरटीआई के तहत कुछ जानकारियां मांगी थी। इसमें एचएसबीसी बैंक की जिनेवा शाखा के पूर्व कर्मचारी हर्वे फाल्सिनी द्वारा एसआईटी चेयरमैन को भेजे गए पत्र की फोटोकॉपी भी मांगी गई थी।
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वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग ने मांगी गई कुछ जानकारियां देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि यह किसी के विश्वास का मामला है और मामले में अभी जांच चल रही है।
इसके बाद वेंकटेश नायक ने सूचना आयोग का रुख किया था। उन्होंने आयोग से आरटीआई अधिनियम- 2005 की धारा- 2 (एच) के तहत, कालेधन पर गठित एसआईटी को ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ के तौर पर माने जाने संबंधी उचित आदेश जारी करने की अपील की थी।