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आरटीआई के तहत जवाबदेह है कालेधन पर बनी एसआईटी

Thu, 12 Oct 2017 12:41 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
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आरटीआई - फोटो : FILE PHOTO
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आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक की अपील पर सूचना आयुक्त बिमल जुल्का ने एसआईटी को आरटीआई एक्ट के दायरे में लाते हुए कहा कि सरकार का हर कदम लोक हित में होना चाहिए।
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कालेधन पर गठित एसआईटी (विशेष जांच दल) आरटीआई एक्ट (सूचना अधिकार कानून) के तहत जवाबदेह है। इस बारे में केंद्रीय सूचना आयोग ने व्यवस्था दी है। आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक की अपील पर सूचना आयुक्त बिमल जुल्का ने एसआईटी को आरटीआई एक्ट के दायरे में लाते हुए कहा कि सरकार का हर कदम लोक हित में होना चाहिए।

दरअसल, वेंकटेश नायक ने वित्त मंत्रालय से सात बिंदुओं पर आरटीआई के तहत कुछ जानकारियां मांगी थी। इसमें एचएसबीसी बैंक की जिनेवा शाखा के पूर्व कर्मचारी हर्वे फाल्सिनी द्वारा एसआईटी चेयरमैन को भेजे गए पत्र की फोटोकॉपी भी मांगी गई थी।
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ये भी पढ़ेंः सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई को RTI कानून के दायरे में लाने के लिए याचिका दायर

वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग ने मांगी गई कुछ जानकारियां देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि यह किसी के विश्वास का मामला है और मामले में अभी जांच चल रही है।  

इसके बाद वेंकटेश नायक ने सूचना आयोग का रुख किया था। उन्होंने आयोग से आरटीआई अधिनियम- 2005 की धारा- 2 (एच) के तहत, कालेधन पर गठित एसआईटी को ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ के तौर पर माने जाने संबंधी उचित आदेश जारी करने की अपील की थी।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ था एसआईटी का गठन

सुप्रीम कोर्ट
विदेश में रखे गए कालेधन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर साल 2014 में एसआईटी का गठन किया गया था। इसका मकसद अर्थव्यवस्था में कालेधन का आकलन करना और उसके संग्रह पर लगाम लगाने के लिए उपाय सुझाना था।

एसआईटी फिलहाल आरबीआई, खुफिया ब्यूरो, ईडी और सीबीआई, वित्तीय खुफिया इकाई व रॉ के अलावा डीआरआई जैसी विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय बिठाते हुए काम रही है।
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