प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति में गुजरात सरकार पिछले तीन सालों में हर दिन नई चुनौतियों का सामना कर रही है। अब भाजपा के लिए लालजी पटेल नई मुसीबत बनकर उभरे हैं। राज्य में भारतीय किसान संघ की स्थापना करने वाले पटेल ने किसान क्रांति मंच नाम से अलग संगठन बनाकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
पटेल ने गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव के ठीक पहले मध्यप्रदेश सरीखा किसान आंदोलन खड़ा करना चाहते हैं। इस कवायद में उन्होंने गुजरात के किसानों की समस्याओं को लेकर सूबे के हर जिलाधिकारी को ज्ञापन देना शुरू कर दिया है। संघ के पूर्व प्रचारक रहे पटेल के निशाने पर पीएम मोदी भी हैं।
प्रचारक को प्रचारक की चुनौती
गुजरात में लंबे समय तक सह प्रांत प्रचारक की जिम्मेदारी निभा चुके लाल जी भाई ने पूर्व संघ प्रचारक रहे पीएम नरेंद्र मोदी को चुनौती दी है। वे अब भी संघ की संस्था स्वदेशी जागरण मंच से सीधे जुड़े हैं। पटेल बुधवार 11 अक्टूबर को पीएम मोदी के गृह जिला मेहसाणा पहुंचे और किसानों के मामले में सरकार को खुली चुनौती पेश की। उन्होंने कसानों की समस्याओं को लेकर मेहसाणा के जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है।
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इसके अलावा वे राज्य के सभी जिलों में इस मामले को लेकर संघर्ष करेंगे। अमर उजाला से बातचीत में लालजी भाई ने कहा कि वे 12 अक्टूबर को पाटन के जिलाधिकारी, उसके बाद साबरकांठा और बनासकांठा के जिला अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें भी ज्ञापन सौंपेंगे। उसके बाद वे एक-एक कर सौराष्ट्र के तहत आने वाले जिलाधिकारियों को भी ज्ञापन देंगे।
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यूपी और महाराष्ट्र की भाजपा सरकारों द्वारा किसानों को दी गई कर्जमाफी पार्टी को गुजरात में भारी पड़ रही है। गुजरात में किसानों की कर्जमाफी का मामला जोर-शोर से लालजी पटेल उठा रहे हैं। लालजी ने कहा कि जब यूपी और माहाराष्ट्र में किसानों का कर्ज माफ हो सकता है तो गुजरात के किसानों का क्यों नहीं?
उन्होंने कहा कि भारी बारिश की वजह से सूबे की न सिर्फ कृषि चौपट हुई है बल्कि भारी पशुधन की भी हानी हुई है। लालजी भाई पटेल का कहना है कि वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान खुद पीएम मोदी ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर बात करते हुए कृषि उत्पाद का दाम लागत मूल्य से डेढ़ गुना करने का ऐलान किया था। मगर केंद्र सरकार को सत्ता में साढे तीन साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन किसानों को उनके उत्पाद का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है।
उल्टे गुजरात में आलम यह है कि पिछले कुछ वर्षों में साढे़ तीन लाख से ज्यादा किसानों ने खेती करनी छोड़ दी है। करीब 13 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती नहीं हो पा रही है। केंद्र सरकार को किसान विरोधी करार देते हुए पटेल ने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल के लिए सरकार चार बार ऑर्डिनेंस लेकर आई थी। अब भी बिल पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। बल्कि ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। जबकि अकेले गुजरात में चुनिंदा 12 उद्योगपतियों का 1लाख 73 हजार रुपए माफ कर दिया गया है।
किसान बीमा पर उठाए सवाल
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लालजी भाई पटेल ने गुजरात सरकार की किसान बीमा योजना पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि किसानों ने बीमा के रूप में कंपनियों को 15हजार करोड़ की राशि प्रदान की है। जबकि कंपनियों की ओर से महज 3000 करोड़ का ही भुगतान हुआ है। उनका कहना है कि भारी बारिश की वजह से गुजरात में किसानों के पशुधन का बडे़ पैमाने पर नुकसान हुआ है। सरकार को यूपी और महाराष्ट्र की तर्ज पर गुजरात के किसानों का कर्ज माफ करना चाहिए।
लालजी भाई संघ से भी है नाराज
जीवन का 48 वर्ष बतौर संघ प्रचारक के रूप में काम कर चुके लालजी भाई पटेल सिर्फ पीएम मोदी और भाजपा से ही नहीं बल्कि संघ की कार्यप्रणाली से भी नाराज हैं। पटेल का आरोप है कि संघ और उसके संगठन मजबूरी के कारण भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। सरकार की नीतियों से खुश न होने के बावजूद भी पीएम मोदी और भाजपा सरकारों की तारीफ करना संघ और उसके संगठनों की मजबूरी है।
आंदोलन के समय पर सफाई
गुजरात विधानसभा चुनाव के ठीक पहले किसान आंदोलन शुरू किए जाने के सवाल पर सफाई देते हुए लालजी भाई ने कहा कि हम किसानों के हक के लिए भाजपा को मजबूर करेंगे। उन्होंने बताया कि इससे पहले वे वर्ष 2004 में किसानों के मुद्दे को लेकर 14 दिन तक लगातार अनशन कर चुके हैं। किसानों के हित के लिए अब आर-पार की जंग लड़ेंगे, हर जिले में किसानों को संगठित करेंगे।