विमानों की तरह अब रेल इंजन में भी ब्लैक बाक्स लगा होगा। इंजन से जुड़े इस यंत्र में माइक्रोफोन व वीडियो रिकॉर्डर लगा होगा जो लोको पायलट की हर गतिविधि का आडियो-वीडियो रिकॉर्ड करेगा। इंजन के बाहर लगा कैमरा लोको कैब से दिखाई देने वाले बाहरी दृश्यों को रिकॉर्ड करेगा।
रेलवे का मानना है कि इस प्रकार की सूचना से दुर्घटना के कारणों जांच-पड़ताल में सुविधा होगी और दुर्घटना होने के बाहरी कारकों से निपटने में मदद मिलेगी। रेल मंत्रालय ने लोको कैब (इंजन) और रेल ट्रैक पर दुर्घटना के बाद विश्लेषण सुनिश्चित करने के लिए करीब 520 रेल इंजनों में लोको कैब वॉयस रिकॉर्डर (एलसीवीआर) फिट करने का निर्णय लिया है।
इस प्रणाली से ट्रेनों के ड्राइवर की कार्यप्रणाली का पता चलता रहेगा। इसमें एक कैमरा और माइक्रोफोन अंदर की ओर जबकि एक कैमरा बाहर की ओर लगा होगा। ये कैमरे वैसे ही काम करेंगे जैसे कि लोको पायलट को चलती ट्रेन में दिखाई देता है।
एलसीवीआर 24 घंटे काम करने वाले कैमरे और माइक्रोफोन से लैस होगा। डाटा स्टोर करने के लिए उपकरण में डिजिटल मेमोरी भी लगी होगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार सभी लोकोमोटिव कैब पर जल्द ही एलसीवीआर की व्यवस्था होगी।
उपकरण की खरीद के आदेश दे दिए गए हैं। इसके अलावा परीक्षण के तौर पर रेलवे ने एक डीजल इंजन में इस प्रकार की एक प्रणाली लगाने के लिए मैसर्स जीई को भी अधिकृत किया है। इसका परीक्षण किया जा रहा है। बता दें कि डीजल इंजनों के लिए रिमोट निगरानी एवं प्रबंधन (रेम्मलॉट) व इलेक्ट्रिक इंजनों के लिए माइक्रोप्रोसेसर आधारित नियंत्रण प्रणाली (एमपीसीएस) विकसित की गई है।