भाजपा नेतृत्व चुनावी राज्य पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ भावी रिश्ते पर एक बार फिर से मंथन करेगा। मंथन का सिलसिला पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के बाद शुरू होगा।
दरअसल पार्टी नेतृत्व ने पूर्व क्रिकेटर और पूर्व सांसद नवजोत सिंह सिद्घू और उनकी विधायक पत्नी नवजोत कौर को इस आशय का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि नवजोत के इस्तीफे के बाद केंद्रीय संगठन महासचिव रामलाल ने सिद्घू दंपति से बातचीत कर फिलहाल कोई बड़ा फैसला ना लेने के लिए मना लिया है।
सिद्घू दंपति ने उनके सामने फिर से साफ कर दिया है कि अगर पार्टी विधानसभा चुनाव में शिअद के साथ जाएगी तो वह अपनी राह अलग कर लेंगे। सिद्घू दंपति इससे पहले कई बार आम आदमी पार्टी से जुड़ने का परोक्ष संदेश दे चुके हैं।
दरअसल पंजाब में नशे केकारोबार का मुद्दा बड़ा बन जाने और इससे राज्य सरकार की छवि बुरी तरह प्रभावित होने के बाद भाजपा नेतृत्व सिद्घू दंपति में उम्मीद की किरण तलाश रहा है। यही कारण है कि बीते पांच महीने की माथापच्ची के बावजूद पार्टी ने अब तक राज्य संगठन के मुखिया के बारे में कोई फैसला नहीं किया है।
पार्टी चाहती है कि सिद्घू दंपति चुनाव अभियान समिति या संगठन की कमान संभाले, जिनके सहारे चुनावी वैतरणी पार की जा सके। हालांकि, सिद्घू लगातार जिम्मेदारी संभालने से पहले शिअद से नाता तोड़ने की शर्त रख रहे हैं। इस क्रम में उन्होंने न केवल संगठन की कमान संभालने से मना किया, बल्कि राज्यसभा की सदस्यता लेने में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई।
शिअद के साथ नहीं हुआ था अंतिम फैसला
पार्टी सूत्रों का कहना है कि करीब दो महीने पूर्व शिअद के साथ ही चुनाव मैदान में उतरने पर सैद्घांतिक सहमति बनी थी, मगर तब भी अंतिम फैसला नहीं लिया गया था। यही कारण है कि नेतृत्व ने राज्य के अध्यक्ष के बारे में भी फैसला टाले रखा है।