केरलम में भाजपा के सत्ता में आने का सपना कभी पूरा नहीं होगा। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने यह दावा करते हुए कहा कि राज्य की धर्मनिरपेक्ष पहचान भाजपा की राजनीतिक पकड़ बढ़ाने की कोशिशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से कांग्रेस को कोई बड़ा खतरा नहीं है, क्योंकि उनकी पार्टी धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करती है।
सीपीआई(एम) की नाकामी से भाजपा को मिला फायदा
केरलम में भाजपा ने हाल के चुनावों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। पार्टी ने विधानसभा की तीन सीटें जीती हैं और तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भी जीत हासिल की है। हालांकि, सतीशन ने भाजपा की इस सफलता को राज्य की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत मानने से इनकार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को यह कामयाबी सत्तारूढ़ रही सीपीआई(एम) की राजनीतिक नाकामियों के कारण मिली है। उनके मुताबिक, दोनों दलों के बीच एक तरह का 'अपवित्र गठजोड़' है। शुक्रवार को पीटीआई वीडियो को दिए इंटरव्यू में सतीशन ने कहा, 'तिरुवनंतपुरम नगर निगम और विधानसभा की तीन सीटें जीतना भाजपा को चांदी की थाली में परोसकर दिए गए तोहफे जैसा था। यह तोहफा उस समय सत्ता में रही सीपीआई(एम) ने दिया।'
धर्मनिरपेक्ष पहचान के कारण भाजपा की राह मुश्किल
सतीशन का कहना है कि भाजपा के लिए केरलम में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना आसान नहीं होगा, क्योंकि राज्य के लोग धर्मनिरपेक्ष मूल्यों में भरोसा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सामुदायिक आधार पर मतदाताओं को बांटने की कोशिश कर रही है, लेकिन इससे राज्य की राजनीतिक तस्वीर में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आने वाला। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि भाजपा केरलम में शासन करेगी। उसे 15 प्रतिशत या उससे कम वोट मिल सकते हैं। ज्यादा से ज्यादा उसका वोट प्रतिशत 20 फीसदी से नीचे ही रहेगा, इससे अधिक नहीं। इसकी वजह यह है कि केरलम धर्मनिरपेक्ष राज्य है।'
परिसीमन और निगम चुनाव को लेकर भी उठाए सवाल
सीपीआई(एम) पर निशाना साधते हुए सतीशन ने कहा कि भाजपा को परिसीमन से जुड़े मुद्दों और नगर निगम चुनाव में कथित गड़बड़ियों से भी फायदा मिला। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले विधानसभा चुनाव में इन तीन सीटों में से दो पर सीपीआई(एम) ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। केवल नेमोम सीट ऐसी थी, जहां स्थिति अलग रही। सतीशन के मुताबिक, भाजपा की चुनौती केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी राजनीति के पीछे एक वैचारिक एजेंडा भी है। उन्होंने भाजपा और संघ परिवार पर आरोप लगाया कि वे अलग-अलग समुदायों के बीच मतभेदों को हवा देकर केरलम की धर्मनिरपेक्ष पहचान को कमजोर करना चाहते हैं।
कांग्रेस ने सांप्रदायिक राजनीति के आगे झुकने से किया इनकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने इस साल अप्रैल में हुए चुनाव प्रचार के दौरान भी सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ अपना रुख मजबूती से बनाए रखा। पार्टी ने चुनावी फायदे के लिए अपने धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। सतीशन ने कहा, 'जब हम विपक्ष में थे, तब भी हमने धर्मनिरपेक्ष रुख अपनाया था और अब भी उसी पर कायम हैं। हमारा स्पष्ट मानना है कि किसी को भी सांप्रदायिक बातें नहीं करनी चाहिए।'
नेताओं पर केरलम का माहौल सांप्रदायिक बनाने का आरोप
सतीशन ने राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की ओर से राज्य में सांप्रदायिक विभाजन बढ़ाने की कोशिशों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ नेता केरलम के सामाजिक माहौल को सांप्रदायिक रंग देने में लगे हुए हैं। मेरी शिकायत यह है कि कुछ राजनीतिक नेता और कुछ धार्मिक नेता केरलम को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
मोदी की लोकप्रियता और आरएसएस के संगठन का भी जिक्र
जब सतीशन से पूछा गया कि केरलम में भाजपा का बढ़ता समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का नतीजा है या आरएसएस की संगठनात्मक ताकत का, तो उन्होंने कहा कि दोनों ही वजहों से पार्टी का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा, 'मोदी के सत्ता में आने के बाद से वे कई वर्षों से शासन कर रहे हैं। यह एक वजह हो सकती है। इसके साथ ही आरएसएस और संघ परिवार लोगों के बीच मतभेद पैदा करने और उन्हें अलग-अलग खेमों में बांटने की कोशिश कर रहे हैं।' सतीशन ने आरोप लगाया कि संघ परिवार ध्रुवीकरण और नफरत फैलाने वाले अभियानों के जरिए अलग-अलग समुदायों के बीच दरार पैदा करना चाहता है। इस तरह की रणनीति से कुछ इलाकों में थोड़े समय के लिए चुनावी फायदा मिल सकता है, लेकिन इससे केरलम की राजनीतिक और सामाजिक पहचान को पूरी तरह बदला नहीं जा सकता।
कांग्रेस को अपने जनाधार पर भरोसा
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को अलग-अलग समुदायों के बीच अपने समर्थन पर पूरा भरोसा है। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री मोदी या आरएसएस को अपने लिए कोई बड़ा राजनीतिक खतरा नहीं मानती। सतीशन ने कहा, 'हमें नहीं लगता कि वे हमारे लिए कोई बड़ा खतरा हैं। हम धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करते हैं और इसी रास्ते पर चलते रहेंगे। हम अपना यही रुख बनाए रखेंगे। केरलम धर्मनिरपेक्ष है और वे यहां कोई बदलाव नहीं कर पाएंगे।'
ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच दरार डालने की कोशिश का आरोप
सतीशन ने भाजपा पर खास तौर से केरलम के ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि भाजपा पिछले एक दशक से इस दिशा में काम कर रही है, लेकिन उसे इसमें बुरी तरह नाकामी मिली है। उन्होंने कहा, 'पिछले 10 साल से भाजपा केरलम में ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसे बुरी तरह नाकामी हाथ लगी है।' कांग्रेस के दोनों समुदायों के साथ मजबूत संबंध हैं। दक्षिणी राज्य का हिंदू समुदाय बड़े पैमाने पर धर्मनिरपेक्ष सोच रखता है। हिंदू मतदाता सीपीआई(एम) और कांग्रेस, दोनों को वोट देते हैं और इसका मतलब यह नहीं है कि वे सांप्रदायिक राजनीति का समर्थन करते हैं।
मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर पर बधाई, लेकिन भाजपा की सोच पर सवाल
नरेंद्र मोदी के सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे करने के संदर्भ में सतीशन ने उन्हें बधाई दी। मोदी ने पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में सरकार का नेतृत्व किया है। हालांकि, सतीशन ने इस मौके पर भाजपा की राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'मैं उन्हें बधाई देता हूं। लेकिन समस्या यह है कि भाजपा एक अलग दिशा में जा रही है। वह हमारे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के साथ नहीं है। यह एक फासीवादी सरकार है।'
बहुसंख्यक समुदाय के वोट जुटाने के लिए नफरत फैलाने का आरोप
सतीशन ने आरोप लगाया कि भाजपा धार्मिक समुदायों के बीच मतभेद पैदा करके बहुसंख्यक समुदाय का समर्थन अपने पक्ष में मजबूत करना चाहती है। उनके मुताबिक, पार्टी की राजनीति नफरत फैलाने वाले अभियानों पर टिकी है। वे नफरत फैलाने के बीज बोकर बहुसंख्यक समुदाय के वोट जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस राजनीति की जिम्मेदारी केवल भाजपा के कुछ नेताओं पर नहीं डाली जा सकती। उनके मुताबिक, पार्टी के पीछे मौजूद व्यापक संघ परिवार ही इस राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है। संघ परिवार का मुख्य एजेंडा लोगों के बीच फूट डालना और नफरत फैलाने वाले अभियान चलाना है।
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'आरएसएस ही भाजपा को नियंत्रित करता है'
जब सतीशन से पूछा गया कि क्या संघ परिवार भाजपा को नियंत्रित करता है और क्या उसका असर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर भी है, तो उन्होंने साफ तौर पर हां में जवाब दिया। उन्होंने विशेष रूप से आरएसएस का नाम लेते हुए कहा कि संगठन का भाजपा पर पूरा नियंत्रण है। सतीशन ने कहा, 'बेशक, संघ परिवार पार्टी को नियंत्रित करता है। यह बात आप भी जानते हैं। इससे कोई इनकार नहीं करेगा।'