तीन दशक बाद किसी एक दल को बहुमत मिलने का चमत्कार करने वाली भाजपा वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 400 सीटें हासिल करने के लक्ष्य के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। संगठन विस्तार के तहत पार्टी ने जिन 120 नई सीटों पर जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है, उन सीटों की रणनीति की कमान सीधे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के हाथों होगी।
इस बीच पार्टी ने दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी लाइन ले ली है। इसके तहत पार्टी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा का सम्मान करने काफैसला किया है, जबकि हरियाणा में डेढ़ दर्जन विधायकों की तीखी नाराजगी के बाद राज्य में किसी कीमत पर नेतृत्व परिवर्तन नहीं करने का फैसला किया गया है।
अगले लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी ने जीती सीटों पर अपनी धमक बरकरार रखते हुए 120 नई सीटें हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ज्यादातर पूर्वी और तटीय राज्यों की इन सीटों पर कमल खिलाने का नेतृत्व खुद शाह संभालेंगे।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस बीच 11 करोड़ नए सदस्यों से न सिर्फ सीधे संवाद करेगी, बल्कि उन्हें पार्टी कार्यक्रमों में व्यस्त भी रखेगी। इसके लिए मतदाता सूची में नए सदस्यों की पहचान करने का निर्देश दिया जा चुका है।
नेतृत्व ने हर बूथ पर 6 तरह के कार्यक्रम करने और मजबूत बूथों पर हर वर्ग के मतदाताओं को बूथ सदस्य बनाने का भी निर्देश दिया है। यह भी कहा गया है कि लोकसभा चुनाव से पहले एक भी बूथ ऐसा न हो, जिसमें भाजपा का सदस्य शामिल न हो। शाह इनमें से कुछ बूथों का समय-समय पर स्वयं निगरानी भी करेंगे।