दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव में सत्ता विरोधी लहर को थामने के लिए पुराने चेहरों से किनारा करने की सफल रणनीति भाजपा पार्टी शासित अन्य राज्यों में भी अपनाएगी। गुजरात सहित अन्य पार्टीशासित राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव बड़ी संख्या में विधायकों के टिकट काटे जाएंगे। यही नहीं पार्टी जहां सत्ता में नहीं है, वहां भी विधायकों के खिलाफ नाराजगी को खत्म करने के लिए यही फार्मूला अपनाया जाएगा।
गौरतलब है कि दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के पुराने पार्षदों की जगह नए और युवा चेहरों को मैदान में उतारने के दांव के सहारे पहले से भी बड़ी जीत हासिल की है।
एमसीडी चुनाव का प्रयोग जल्द होने वाले गुजरात, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक हालांकि गुजरात में मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी पहले भी बड़ी संख्या में विधायकों का टिकट काट चुके हैं। मगर इस बार यह संख्या 50 फीसदी को पार कर सकती है। इसी प्रकार हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जहां पार्टी सत्ता में नहीं है, वहीं विधायकों के प्रति नाराजगी का नुकसान पार्टी को होने से बचाने के लिए यही तरीका अपनाया जाएगा।
पार्टी अपने इस दांव के सहारे न सिर्फनाराज मतदाताओं की नाराजगी दूर करना चाहती है, बल्कि राज्यों में नेतृत्व की नई और युवा पीढ़ी को भी आगे बढ़ने का मौका देना चाहती है। गौरतलब है कि एमसीडी में बीते 10 साल से सत्ता पर काबिज पार्टी को एंटी इंकम्बेंसी का डर सता रहा था। इसकी काट के लिए नेतृत्व ने वर्तमान पार्षदों की जगह मतदाताओं के सामने नए चेहरे को उतारने का फैसला किया। यह प्रयोग इतना सफल रहा कि इससे न सिर्फ पार्टी ने सत्ता विरोधी लहर को थामने में कामयाबी पाई, बल्कि पहले की तुलना में सीटों की संख्या भी बढ़ा ली।
नए और युवा नेतृत्व को सामने लाने का फार्मूला महज विधायकों तक ही सीमित नहीं रहेगा। राज्यों के सरकार की कमान भी नए चेहरों को दी जाएगी। फिलहाल रणनीति यह है कि पार्टीशासित राज्यों में चुनाव के पहले की बजाय चुनाव के बाद सरकार के नेतृत्व में परिवर्तन किया जाए। यह फार्मूला मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।