अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया, इस पर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सामान्य तौर पर कोई सरकार चुनाव के बाद यह साबित करने के लिए विश्वासमत हासिल करती है कि उसके पास सदन के बहुमत का समर्थन हासिल है। या बाद में जब विपक्ष उस पर अल्पमत में होने का आरोप लगाता है, और नियमों के अंतर्गत सरकार से विश्वासमत साबित करने की मांग करता है, तब सरकार विश्वासमत हासिल कर सदन में अपनी ताकत दिखाती है। लेकिन इस समय दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी सरकार का प्रचंड बहुमत है, और विपक्ष ने उस पर अल्पमत होने का आरोप भी नहीं लगाया है, ऐसे में अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा पटल पर विश्वासमत क्यों हासिल किया? यह विश्वासमत हासिल करके वे किसे और क्या संदेश देना चाहते हैं?
राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में बहुमत हासिल कर यह संकेत दिया है कि उनके विधायकों का पूर्ण समर्थन उनके साथ बना हुआ है। हम इसी समय देख रहे हैं कि झारखंड की सत्ताधारी पार्टी अपने विधायकों के तोड़े जाने के डर से राज्य से दूर रखे हुए है और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के विधायकों की खरीद-फरोख्त हो चुकी है, आम आदमी पार्टी के सभी विधायक राजधानी में भाजपा की नाक के नीचे जमे हुए हैं। यह केजरीवाल की राजनीतिक मजबूती और अपने विधायकों पर पकड़ का संदेश है। जनता के बीच वे यह दावा भी कर सकते हैं कि उनकी पार्टी के विधायक ईमानदार हैं और उन्हें खरीदना संभव नहीं है। गुजरात-हिमाचल प्रदेश के चुनावों में उन्हें इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक शांतनु गुप्ता ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल स्टंटबाजी की राजनीति करते हैं। पहले वे दूसरे दलों के नेताओं पर आरोप लगाकर समाचार की सुर्खियों में रहते थे, तो अब एक ही योजना का बार-बार उद्घाटन और प्रचार करके सुर्खियों में बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि देश में सरकारों के द्वारा विश्वासमत हासिल करने की जो परंपरा रही है, उनमें से किसी भी पैमाने पर केजरीवाल सरकार को विश्वासमत हासिल करने की आवश्यकता नहीं महसूस होती। ऐसे में यही माना जा सकता है कि यह हेडलाइन में आने के लिए और भ्रष्टाचार के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए विश्वासमत हासिल किया जा रहा है।
शांतनु गुप्ता ने कहा कि भाजपा को भी मीडिया का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए जाना जाता है, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने यह दिखाया है कि वे इस खेल में भाजपा से ज्यादा बेहतर हैं और वे उसे इस मोर्चे पर लगातार चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में जबकि भाजपा को गुजरात और हिमाचल प्रदेश में आम आदमी पार्टी से चुनौती भी मिल रही है, भाजपा को केजरीवाल की हेडलाइन पॉलिटिक्स से निपटने की कला सीखनी होगी।
भाजपा नेता सरदार आरपी सिंह ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार पर इस समय भ्रष्टाचार के गंभीर संकट हैं। उनके एक मंत्री सत्येंद्र जैन भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल में हैं, तो दूसरे मंत्री मनीष सिसोदिया जेल जाने की तैयारी में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आबकारी मंत्री के रूप में मनीष सिसोदिया ने नई शराब नीति बनाने में सैकड़ों करोड़ रुपये का घोटाला किया और शिक्षा मंत्री के रूप में काम करते हुए स्कूलों में कक्षाएं बनाने के नाम पर टॉयलेट बनाकर घोटाला किया। उन्होंने कहा कि सीवीसी की जांच रिपोर्ट में इस भ्रष्टाचार का खुलासा हो चुका है, इसलिए उनका भी जेल जाना तय है।
कांग्रेस नेता मुदित अग्रवाल ने कहा कि सच्चाई यह है कि अरविंद केजरीवाल हर उस वायदे पर असफल साबित हुए हैं जिसका वादा कर वे राजनीति में आए थे। उन्होंने लोकपाल के मुद्दे पर खूब हंगामा किया, लेकिन दिल्ली सरकार में लोकपाल का अब तक पता नहीं है। उन्होंने बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य का दावा किया था, लेकिन पूरे देश ने देखा कि किस तरह कोरोना काल में दिल्ली का मोहल्ला क्लीनिक फ्लॉप साबित हुआ और लोग बेमौत मरने के लिए मजबूर हुए।
मुदित अग्रवाल ने आरोप लगाया कि इसी तरह अरविंद केजरीवाल अपनी शिक्षा व्यवस्था को दुनिया में सबसे बेहतर बताते हैं, लेकिन वे कभी यह नहीं बताते कि दिल्ली के 90 फीसदी स्कूलों में विज्ञान और गणित पढ़ाने की सुविधा तक नहीं है। इसके बिना बच्चों को डॉक्टर-इंजीनियर बनने का सपना पूरा नहीं हो सकता।
अब उनका ईमानदारी का दावा भी बुरी तरह असफल साबित हो रहा है, जब दिल्ली से लेकर पंजाब तक आम आदमी पार्टी के मंत्री लगातार जेल जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ही राजघाट जाकर प्रदर्शन करने और विश्वासमत हासिल करने की नौटंकी की जाती है।