रोहतक जो कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का अपना गृह जिला है, भाजपा ने इस बार विधानसभा चुनाव में उन्हें यहीं पर घेरने और हराने की रणनीति बनाई है। लोकसभा चुनाव में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोनीपत से और उनके पुत्र दीपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक सीट से हार चुके हैं। इन दोनों सीटों पर भाजपा जीती है। अब इसके बाद भाजपा ने पूर्व सीएम को उनकी अपनी विधानसभा सीट किलोई-गढ़ी सांपला में घेरने की रणनीति बना ली है। अगर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के बयानों पर गौर करें तो भाजपा हुड्डा को विधानसभा चुनाव इतनी आसानी से नहीं जीतने देगी।
सीएम खट्टर सार्वजनिक सभा में कह चुके हैं कि इस बार किलोई विधानसभा सीट का नतीजा दुनिया देखेगी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला कहते हैं कि अपनी जनविरोधी नीतियों के चलते हुड्डा प्रदेश में जनाधार खो चुके हैं। जिन तीन जिलों के विधायकों के बलबूते वे कांग्रेस हाईकमान तक को आंख दिखा देते थे, इस बार के चुनाव में उन्हें यहां से हार का सामना करना पड़ सकता है। रोहतक, सोनीपत और झज्जर इन तीनों जिलों में हुड्डा के लिए एक भी सीट जीता पाना बेहद मुश्किल है। बतौर भाजपा नेता, इसमें कोई हैरानी नहीं कि वे खुद अपनी विधानसभा सीट हार जाएं।
भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है 'रोहतक'
पिछले पांच साल के दौरान पीएम मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रोहतक में कई दौरे कर चुके हैं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान अमित शाह ने रोहतक में आकर ही हुड्डा को घेरने की विशेष रणनीति बनाई थी। बाकायदा उनकी रणनीति पर काम भी हुआ। अमित शाह हर माह पार्टी प्रभारी डॉ. अनिल जैन, सीएम खट्टर और प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला से रिपोर्ट लेते रहे। इसका नतीजा लोकसभा चुनाव में देखने को मिला। जब यह कहा जा रहा था कि कांग्रेस भले ही दूसरी सीटें हार जाए, लेकिन रोहतक और सोनीपत सीट नहीं हारेंगे।
चुनावी रिजल्ट इसके विपरित आए और कांग्रेस पार्टी ये दोनों सीटें हार गई। लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी ने रोहतक में जनसभा की थी। उसके बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर अमित शाह रोहतक में पहुंचे थे। अब रविवार को पीएम मोदी रोहतक में ही मेगा रैली को संबोधित करने आ रहे हैं। भाजपा नेता वीरेंद्र का कहना है कि इस बार रोहतक जिला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को शिकस्त देगा।
भाजपा ने पहले 90 में से 75 सीटें जीतने की योजना बनाई थी, लेकिन अब वह टारगेट आगे बढ़कर 79 सीटों पर पहुंच गया है। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा इतने विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 49 सीटें मिली थी। उस दौरान कांग्रेस और इनेलो मजबूत स्थिति में थीं, जबकि आज ये दोनों पार्टियां नाजुक दौर से गुजर रही हैं। गर्ग के मुताबिक, भाजपा अगर अस्सी के पार पहुंच जाए तो कोई बड़ी बात नहीं।
हुड्डा-शैलजा की एकजुटता का असर नहीं होगा
प्रदेश में जब विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है तो कांग्रेस ने कुमारी शैलजा को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंप दी है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनाव समिति का अध्यक्ष और विधानसभा में विधायक दल का नेता बना दिया गया। लोकसभा चुनाव से पहले भी कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश के विभिन्न धड़ों के नेताओं को एक बस में बैठाकर यह संदेश देने का प्रयास किया था कि पार्टी के भीतर सब ठीक है।
हालांकि पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी खत्म नहीं हुई और उसका नतीजा लोकसभा चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ा। प्रदेश की राजनीति को जानने वाले कहते हैं कि अब भाजपा ने विधानसभा की हर सीट पर चक्रव्यूह की रचना कर दी है, तब कांग्रेस ने कुमारी शैलजा और हुड्डा को आगे किया है। अब बहुत देर हो चुकी है। दूसरी ओर प्रदेश के जातिगत समीकरण भी भाजपा के पक्ष में जाते दिख रहे हैं।
चूंकि बहुत से जाट नेता अब भाजपा में आ गए हैं, इसलिए पार्टी को जाटों के भी वोट मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर भाजपा के गैर-जाट वोटों के चक्रव्यूह को अभी तक कांग्रेस या कोई अन्य पार्टी नहीं तोड़ सकी है। ऐसी स्थिति में हुड्डा या शैलजा के लिए कांग्रेस को दोबारा से सत्ता में लाना इतना आसान नहीं होगा।