साल 1989 टीम इंडिया पाकिस्तान के दौरे पर गई, साथ एक 16 साल का लड़का पहली बार इस दौरे पर गया। तब भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान के दौरे पर जाया करती थी, कोई नेता किसी को पाकिस्तान भेजने की बात नहीं करता था। खिलाड़ी जाते, खेलते और दोनों देश के क्रिकेट प्रेमी मैच के रोमांच में डूब जाते। भारत-पाक के मैच तब भी उतने ही टक्कर के हुआ करते थे, जितना कि आज मौका-मौका के जुमले के दौर में होता है।
तेंदुलकर की पहली सीरीज थी। मैच पेशावार में हो रहा था। खराब लाइट के चलते वनडे मैच रद्द हो गया था और 20-20 ओवर का एग्जिबिशन मैच खेला गया। पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 157 रन बनाए थे। भारत को पांच ओवर में जीत के लिए 69 रनों की जरूरत थी। सचिन ने बल्ला घुमाना शुरू किया और दो विकेट चटका चुके मुश्ताक अहमद के ओवर में दो छक्के जड़ दिए। अब्दुल कादिर जब गेंदबाजी के लिए आए तो उन्होंने तेंदुलकर को ललकारते हुए कहा, 'बच्चों को क्यों मार रहे हो? हमें भी मारकर दिखाओ?'
सचिन बस हल्का सा मुस्कुराए और फिर कादिर ने ओवर की पहली गेंद फेंकी सचिन आगे निकले, गेंद के टप्पे तक पहुंचे और बल्ला भांज दिया, गेंद ऑफ के ऊपर से सीधे बाउंड्री पार गिरी, अंपायर ने अपने दोनों हाथ हवा में लहरा दिए 'छक्का'। इसके बाद सचिन ने तीन और छक्के जड़े, कादिर को सचिन में एक महान खिलाड़ी नजर आने लगा था। एक 16 साल के लड़के ने कादिर को पानी-पानी कर दिया था, लेकिन टीम इंडिया उस मैच को चार रन से हार गई।
कादिर जैसा कलाई का स्पिनर पाकिस्तान में दूसरा नहीं हुआ। कदिर कहते थे कि उनके पास दो हथियार थे। पहला उनका ऐक्शन और दूसरा उनकी वैरायटी। शुरुआती 90 के दशक वाले क्रिकेट प्रेमियों के लिए सबसे दिलचस्प मुकाबला सचिन तेंदुलकर बनाम अब्दुल कादिर का होता था। कादिर के ओवर में चार छक्के जड़ना तेंदुलकर के भारतीय क्रिकेट के सफर का एंट्री पॉइंट साबित हुआ।
अब्दुल कादिर ने 67 टेस्ट और 104 एकदिवसीय मैचों में 1977 और 1993 के बीच पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था। कादिर पिच पर अपने खास आक्रमक अंदाज के लिए जाने जाते थे। अब्दुल कादिर ने पाकिस्तान के लिए 67 टेस्ट और 104 वनडे क्रिकेट मैच खेला था। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने 368 विकेट लिए थे। अब्दुल कादिर जिन्होंने शेन वॉर्न को लेग स्पिन की कमान थमाई। ग्राहम गूच कादिर को वॉर्न से भी बेहतर स्पिनर मानते थे।अलविदा लीजेंड...