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पीएम मोदी के जरिए हुड्डा को उनके घर में ही चित करने में जुटी भाजपा, 8 सितंबर को बजेगा चुनावी बिगुल

Sat, 07 Sep 2019 06:43 PM IST
आसिम खान जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा (फाइल फोटो)
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लोकसभा चुनाव में दस में से दस सीटें जीतने वाली भाजपा अब हरियाणा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को उनके अपने ही घर में चित करने के प्रयासों में लगी है। इसके लिए आठ सितंबर को पीएम मोदी रोहतक आ रहे हैं। वे यहां से प्रदेश को कई योजनाओं की सौगात देंगे। भाजपा नेताओं की मानें तो पीएम मोदी की यह रैली प्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान हुई सभी रैलियों में जुटी भीड़ का रिकॉर्ड तोड़ देगी। वजह, इस बार पार्टी में भीड़ जुटाने वाले चेहरे आ गए हैं। 

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यानी इनेलो से जुड़े अनेक नेता अब भाजपा का दामन थाम चुके हैं। इन्हीं के बलबूते भाजपा को पीएम मोदी की इस रैली में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ आने की उम्मीद है। पीएम मोदी की इस रैली के बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज जाएगा। रैली की सफलता काफी हद तक यह तय कर देगी कि इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को उनके अपने घर में शिकस्त देने की जो रणनीति बनाई है, वह कितनी कारगर साबित होगी। 

इस रैली में अधिक भीड़ आने के कई कारण हैं। पहला, प्रदेश भाजपा ने इसमें सभी पन्ना प्रमुखों को बुलाया है। अगर इनकी संख्या देखें तो वह दो लाख के पार चली जाती है। इसके बाद पार्टी के सभी जिला स्तरीय संगठन, जिनमें नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं, रैली में भाग लेंगे। तीसरा नंबर आम जनता या पार्टी समर्थकों का है। हरियाणा सरकार में मंत्री एवं रोहतक शहर के विधायक मनीष ग्रोवर, जो कि इस रैली को सफल बनाने के लिए कई दिनों से जुटे हैं, का कहना है कि यह रैली पिछली सभी रैलियों का रिकार्ड तोड़ देगी। 
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जिस तरह से पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता भीड़ जुटाने का दावा कर रहे हैं, उससे लगता है कि रैली स्थल छोटा पड़ जाएगा। प्रदेश की राजनीति की गहरी समझ रखने वाले रविंद्र कुमार कहते हैं, पीएम मोदी की इस रैली में मेगा भीड़ जुटाने का भाजपा नेताओं का दावा काफी हद तक सही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस बार भाजपा के पास भीड़ जुटाने वाले नेता आ गए हैं। 

यहां हम बात कर रहे हैं उन इनेलो नेताओं की, जो अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं। प्रदेश का इतिहास देखेंगे तो रैली करने में चौ. देवीलाल और उनकी पार्टी का कोई सानी नहीं रहा। सबसे ज्यादा भीड़ इनेलो की रैलियों में ही जुटती रही है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी का नंबर आता है। भीड़ जुटाने के मामले में भाजपा तीसरे नंबर पर रही है, लेकिन अब वह पहले नंबर पर आ गई है। 

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भाजपा की रणनीति है कि अब हुड्डा को विधानसभा चुनाव में भी घेरेंगे और हराएंगे

रोहतक जो कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का अपना गृह जिला है, भाजपा ने इस बार विधानसभा चुनाव में उन्हें यहीं पर घेरने और हराने की रणनीति बनाई है। लोकसभा चुनाव में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोनीपत से और उनके पुत्र दीपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक सीट से हार चुके हैं। इन दोनों सीटों पर भाजपा जीती है। अब इसके बाद भाजपा ने पूर्व सीएम को उनकी अपनी विधानसभा सीट किलोई-गढ़ी सांपला में घेरने की रणनीति बना ली है। अगर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के बयानों पर गौर करें तो भाजपा हुड्डा को विधानसभा चुनाव इतनी आसानी से नहीं जीतने देगी। 

सीएम खट्टर सार्वजनिक सभा में कह चुके हैं कि इस बार किलोई विधानसभा सीट का नतीजा दुनिया देखेगी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला कहते हैं कि अपनी जनविरोधी नीतियों के चलते हुड्डा प्रदेश में जनाधार खो चुके हैं। जिन तीन जिलों के विधायकों के बलबूते वे कांग्रेस हाईकमान तक को आंख दिखा देते थे, इस बार के चुनाव में उन्हें यहां से हार का सामना करना पड़ सकता है। रोहतक, सोनीपत और झज्जर इन तीनों जिलों में हुड्डा के लिए एक भी सीट जीता पाना बेहद मुश्किल है। बतौर भाजपा नेता, इसमें कोई हैरानी नहीं कि वे खुद अपनी विधानसभा सीट हार जाएं।  

भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है 'रोहतक'

पिछले पांच साल के दौरान पीएम मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रोहतक में कई दौरे कर चुके हैं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान अमित शाह ने रोहतक में आकर ही हुड्डा को घेरने की विशेष रणनीति बनाई थी। बाकायदा उनकी रणनीति पर काम भी हुआ। अमित शाह हर माह पार्टी प्रभारी डॉ. अनिल जैन, सीएम खट्टर और प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला से रिपोर्ट लेते रहे। इसका नतीजा लोकसभा चुनाव में देखने को मिला। जब यह कहा जा रहा था कि कांग्रेस भले ही दूसरी सीटें हार जाए, लेकिन रोहतक और सोनीपत सीट नहीं हारेंगे। 

चुनावी रिजल्ट इसके विपरित आए और कांग्रेस पार्टी ये दोनों सीटें हार गई। लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी ने रोहतक में जनसभा की थी। उसके बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर अमित शाह रोहतक में पहुंचे थे। अब रविवार को पीएम मोदी रोहतक में ही मेगा रैली को संबोधित करने आ रहे हैं। भाजपा नेता वीरेंद्र का कहना है कि इस बार रोहतक जिला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को शिकस्त देगा।

भाजपा ने पहले 90 में से 75 सीटें जीतने की योजना बनाई थी, लेकिन अब वह टारगेट आगे बढ़कर 79 सीटों पर पहुंच गया है। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा इतने विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 49 सीटें मिली थी। उस दौरान कांग्रेस और इनेलो मजबूत स्थिति में थीं, जबकि आज ये दोनों पार्टियां नाजुक दौर से गुजर रही हैं। गर्ग के मुताबिक, भाजपा अगर अस्सी के पार पहुंच जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। 

हुड्डा-शैलजा की एकजुटता का असर नहीं होगा

प्रदेश में जब विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है तो कांग्रेस ने कुमारी शैलजा को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंप दी है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनाव समिति का अध्यक्ष और विधानसभा में विधायक दल का नेता बना दिया गया। लोकसभा चुनाव से पहले भी कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश के विभिन्न धड़ों के नेताओं को एक बस में बैठाकर यह संदेश देने का प्रयास किया था कि पार्टी के भीतर सब ठीक है। 

हालांकि पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी खत्म नहीं हुई और उसका नतीजा लोकसभा चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ा। प्रदेश की राजनीति को जानने वाले कहते हैं कि अब भाजपा ने विधानसभा की हर सीट पर चक्रव्यूह की रचना कर दी है, तब कांग्रेस ने कुमारी शैलजा और हुड्डा को आगे किया है। अब बहुत देर हो चुकी है। दूसरी ओर प्रदेश के जातिगत समीकरण भी भाजपा के पक्ष में जाते दिख रहे हैं। 

चूंकि बहुत से जाट नेता अब भाजपा में आ गए हैं, इसलिए पार्टी को जाटों के भी वोट मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर भाजपा के गैर-जाट वोटों के चक्रव्यूह को अभी तक कांग्रेस या कोई अन्य पार्टी नहीं तोड़ सकी है। ऐसी स्थिति में हुड्डा या शैलजा के लिए कांग्रेस को दोबारा से सत्ता में लाना इतना आसान नहीं होगा। 
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