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Kerala: केरल BJP अध्यक्ष को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने मंजेश्वरम चुनाव रिश्वत केस में के. सुरेंद्रन को किया बरी

Sat, 05 Oct 2024 03:27 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

केरल की एक अदालत ने राज्य भाजपा इकाई के अध्यक्ष के. सुरेंद्रन को मंजेश्वरम चुनाव रिश्वत मामले में बड़ी राहत देते हुए उन्हें बरी कर दिया है। इस मामले में के. सुरेंद्रन समेत पांच अन्य को बरी किया गया है।
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केरल BJP अध्यक्ष को मिली बड़ी राहत - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल के कासरगोड जिले की एक सत्र अदालत ने शनिवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन और पांच अन्य को मंजेश्वरम चुनाव रिश्वत मामले से बरी कर दिया। मामले में कासरगोड सत्र न्यायाधीश सानू एस. पनिकर ने सभी को बरी किया।
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'अदालत ने कहा मुकदमा चलाने की जरूरत नहीं'
वहीं इस फैसले के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के वकील ने पत्रकारों से कहा कि अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया केस का काेई मतलब नही था। वकील ने यह भी कहा कि अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को स्वीकार कर लिया कि मामले में मुकदमा चलाने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि बचाव पक्ष यह साबित करने में सक्षम था कि मामला मनगढ़ंत था और इसके पीछे एक राजनीतिक साजिश थी।

माकपा, कांग्रेस और IUML की साजिश विफल- सुरेंद्रन
कोर्ट के फैसले के बाद अदालत के बाहर मीडिया से बात करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने याद दिलाया कि वह शुरू से ही कह रहे थे: कि सत्य की जीत होगी। उन्होंने कहा कि ये केस उनकी राजनीतिक संभावनाओं को नष्ट करने के लिए उन्हें झूठे मामले में फंसाने की एक सुनियोजित साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया, इस साजिश के पीछे माकपा, कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता थे। उन्होंने दावा किया कि झूठे मामले के पीछे का उद्देश्य पार्टी को कमजोर करना और उनका आत्मविश्वास हिलाना था, लेकिन यह असफल रहा। 
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प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को धमकाने का आरोप
बता दें कि केरल पुलिस की अपराध शाखा ने पिछले साल जनवरी में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। के. सुरेंद्रन पर 2021 के विधानसभा चुनावों में मंजेश्वरम निर्वाचन क्षेत्र के लिए अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से पीछे हटने के लिए धमकाने का आरोप लगाया गया था। उन पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए थे, जो गैर-जमानती हैं। 

यह मामला एक मजिस्ट्रेट कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दर्ज किया गया था, जिसने माकपा उम्मीदवार वीवी रामेसन की तरफ से दायर याचिका पर विचार किया था, जिन्होंने मंजेश्वरम में सुरेंद्रन के खिलाफ चुनाव लड़ा था। भारतीय दंड संहिता की धारा 171 (बी) और (ई) (रिश्वत) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में मामला अपराध शाखा को सौंप दिया गया था। 

बसपा उम्मीदवार को दी गई थी रिश्वत
वहीं बसपा उम्मीदवार सुंदरा ने आरोप लगाया था कि उन्हें शुरू में धमकाया गया और बाद में भाजपा ने चुनाव से हटने के लिए 2.5 लाख रुपये की रिश्वत दी। सुंदरा ने दावा किया था कि युवा मोर्चा के नेता और सुरेंद्रन के करीबी सहयोगी सुनील नाइक ने उन्हें पैसे और एक स्मार्टफोन सौंपा था। भाजपा ने आरोपों से इनकार किया था। यक्षगान कलाकार सुंदरा ने 2016 में चुनाव लड़ा था। उन्होंने 2021 में एक बार फिर अपना नामांकन दाखिल किया था, लेकिन फिर वापस ले लिया था। हालांकि, सुरेंद्रन मंजेश्वरम से चुनाव हार गए।
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